G7 देशों ने ईरान से हूतियों को सैन्य मदद देना बंद करने की मांग की है। रेड सी में जारी तनाव से शिपिंग लागत और देरी बढ़ रही है, जिसका सीधा असर भारतीय कंपनियों के मार्जिन और ट्रेड पर पड़ रहा है।
दुनिया के सात सबसे अमीर देशों के समूह यानी G7 ने ईरान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वह हूती विद्रोहियों को सैन्य मदद देना बंद करे। रेड सी में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमले इंटरनेशनल ट्रेड को बड़े स्तर पर बाधित कर रहे हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह सिर्फ एक विदेश नीति का मुद्दा नहीं है, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में बढ़ते जोखिम का संकेत है।
लॉजिस्टिक्स और ट्रेड पर असर
रेड सी संकट के चलते जहाजों को स्वेज नहर के बजाय 'केप ऑफ गुड होप' का लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इससे भारत और यूरोप के बीच शिपिंग की दूरी और समय दोनों बढ़ गए हैं। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और एग्री-कमोडिटी जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स की लॉजिस्टिक लागत में भारी उछाल आया है, जिससे कंपनियों के नेट प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है।
एनर्जी कॉस्ट और महंगाई का डर
शिपिंग के महंगे होने और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ने से कच्चे तेल (Crude Oil) की इंपोर्ट कॉस्ट भी प्रभावित हो रही है। यदि ये हालात लंबे समय तक बने रहते हैं, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और एनर्जी-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के ऑपरेटिंग प्रदर्शन पर दबाव बढ़ना तय है। यह स्थिति डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज में इन्फ्लेशनरी प्रेशर यानी महंगाई को और बढ़ा सकती है।
निवेशकों के लिए जरूरी मॉनिटरेबल्स
अगर आप ग्लोबल ट्रेड या लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कंपनियों में निवेशित हैं, तो फ्रेट रेट इंडेक्स और क्रूड ऑयल की कीमतों पर बारीक नजर रखें। मुख्य सवाल यह है कि क्या कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डालकर अपना मार्जिन बचा पाएंगी या फिर आने वाली तिमाहियों में इनके मुनाफे में गिरावट देखने को मिलेगी। मार्केट फिलहाल कूटनीतिक स्तर पर किसी बड़े सुधार की उम्मीद कर रहा है, जिससे शिपिंग रूट्स फिर से सामान्य हो सकें।
