G7 में दरार! क्रिटिकल मिनरल्स पर अमेरिका-यूरोप में घमासान, चीन पर निर्भरता कम करने की राह मुश्किल

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AuthorAditya Rao|Published at:
G7 में दरार! क्रिटिकल मिनरल्स पर अमेरिका-यूरोप में घमासान, चीन पर निर्भरता कम करने की राह मुश्किल
Overview

G7 देशों के बीच भविष्य की टेक्नोलॉजी और ऊर्जा क्रांति के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की कोशिशों में बड़ी दरार आ गई है। खास तौर पर अमेरिका और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच संयुक्त स्टॉकपाइलिंग (Joint Stockpiling) को लेकर गहरा मतभेद उभर कर सामने आया है, जिससे चीन पर निर्भरता कम करने की योजनाएं अधर में लटक सकती हैं।

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क्रिटिकल मिनरल्स क्यों हैं इतने अहम?

ग्रुप ऑफ सेवन (G7) देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स के लिए एक स्थायी सेक्रेटेरिएट (Permanent Secretariat) बनाने की चर्चाएं इस बात का संकेत देती हैं कि दुनिया चीन के दबदबे वाली रिसोर्स सप्लाई चेन पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है। लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ्स जैसे खनिज रक्षा, ऊर्जा क्रांति (Energy Transition) और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद जरूरी हैं। वर्तमान में, चीन वैश्विक स्तर पर इन खनिजों की प्रोसेसिंग क्षमता में हावी है, जहां वह कुछ रेयर अर्थ्स के लिए 90% से ज्यादा और लिथियम, कोबाल्ट व ग्रेफाइट के लिए 70-90% तक प्रोसेसिंग करता है। यह एकाग्रता (Concentration) महत्वपूर्ण आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम पैदा करती है।

यूरोप का संयुक्त स्टॉकपाइल पर संशय?

सप्लाई चेन को विविध बनाने के साझा लक्ष्य के बावजूद, G7 के भीतर महत्वपूर्ण मतभेद हैं। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने सहयोग बढ़ाया है, जिसमें चीन की बाजार-विकृत प्रथाओं (Market-distorting practices) से निपटने के लिए एक समझौता भी शामिल है। हालांकि, यूरोप संसाधन प्रबंधन को मिलकर करने को लेकर सतर्क दिख रहा है। यूरोपीय सरकारों ने कथित तौर पर एक साझा भंडार (Shared Stockpile) के विचार को खारिज कर दिया है, और वे संकट के समय महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच खोने की चिंता के कारण अपने राष्ट्रीय भंडार (National Reserves) पर नियंत्रण रखना पसंद कर रहे हैं। यूरोपीय संघ के कई सदस्य देश, जिनमें इटली, फ्रांस और जर्मनी शामिल हैं, राष्ट्रीय नियंत्रण की इसी प्राथमिकता को दर्शाते हुए स्वतंत्र रूप से अपनी पायलट स्टॉकपाइल परियोजनाओं (Pilot Stockpile Projects) को विकसित कर रहे हैं।

बढ़ती मांग और तेज प्रतिस्पर्धा

क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षा बढ़ाने की यह कवायद बढ़ती वैश्विक मांग से प्रेरित है, जो ऊर्जा क्रांति, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और AI डेटा सेंटरों से बढ़ी है। अकेले लिथियम की मांग 2024 में लगभग 30% बढ़ गई, और कुछ रेयर अर्थ्स की कीमतें 2020 से 3 गुना तक बढ़ चुकी हैं। यह प्रतिस्पर्धा को तेज करता है और सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता के जोखिम को बढ़ाता है। अतीत में अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी समझौते (International Commodity Agreements) अक्सर कीमतों और राजनीति में उतार-चढ़ाव के कारण विफल रहे हैं, जो स्थायी सहयोग की कठिनाई को दर्शाते हैं। क्रिटिकल मिनरल्स के लिए प्रतिस्पर्धा को पहले से ही तेल युग से अधिक जटिल और विघटनकारी (Disruptive) माना जा रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) और ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) जैसी संस्थाएं सप्लाई चेन रेजिलिएंस (Supply Chain Resilience) और स्टॉकपाइलिंग पर सलाह और प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। IEA और OECD की एक संयुक्त रिपोर्ट में पारदर्शिता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है, लेकिन उच्च लागत और अनुकूलता (Compatibility) जैसी प्रमुख चुनौतियों को भी रेखांकित किया गया है।

पश्चिमी सप्लाई चेन के लिए बाधाएं

G7 सेक्रेटेरिएट और मजबूत राष्ट्रीय स्टॉकपाइल स्थापित करने में बड़ी चुनौतियां हैं। मुख्य बाधा चीन की प्रोसेसिंग पर मजबूत पकड़ है। पश्चिमी प्रोसेसिंग क्षमता का निर्माण एक विशाल कार्य है जिसमें दशकों लग सकते हैं और भारी निवेश (Huge Investment) की आवश्यकता होगी; अमेरिका को अकेले ही इस स्तर तक पहुंचने में 10-20 साल लग सकते हैं। यह विविधीकरण (Diversification) को एक कठिन और लंबी प्रक्रिया बनाता है, जो मूल्य में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक मुद्दों व निर्यात नियंत्रणों (Export Controls) से बिगड़ने वाली आपूर्ति में व्यवधानों के प्रति संवेदनशील है। अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी समूहों की पिछली विफलताएं इस बात की चेतावनी देती हैं कि राष्ट्रीय हितों और बाजार शक्तियों के टकराने पर आपूर्ति का प्रबंधन करना कितना मुश्किल है। बड़े सरकारी स्टॉकपाइल बाजारों को भी विकृत कर सकते हैं, वाणिज्यिक उपयोग से सामग्री को हटा सकते हैं, और खरीद निर्णयों को विशुद्ध अर्थशास्त्र के बजाय राजनीतिक संबंधों की ओर स्थानांतरित कर सकते हैं। नियंत्रण पर अमेरिका-यूरोपीय संघ के असहमति से यह भी सवाल उठता है कि नई G7 पहल कितनी प्रभावी होगी।

आगे की राह: संसाधनों को सुरक्षित करना

एक स्थायी G7 सेक्रेटेरिएट की स्थापना की समय-सीमा अनिश्चित है, हालांकि जून में G7 नेताओं की शिखर बैठक के बाद प्रगति तेज हो सकती है। इस बीच, इटली, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों के नेतृत्व में यूरोपीय संघ के पायलट स्टॉकपाइल परियोजनाओं को विकसित करने के प्रयास राष्ट्रीय लचीलेपन (National Resilience) पर ध्यान केंद्रित करते हैं। व्यापक प्रवृत्ति एक वैश्विक बदलाव की है जो महत्वपूर्ण कच्चे माल (Critical Raw Materials) की आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने की ओर बढ़ रही है। राष्ट्र विविधीकरण, घरेलू उत्पादन और रणनीतिक स्टॉकपाइलों के माध्यम से निर्भरता कम करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं। IEA और OECD बेहतर ट्रैकिंग और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना जारी रखे हुए हैं, यह जानते हुए कि सुरक्षित, विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाएं आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा क्रांति के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.