अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान परंपरा के मुताबिक होने वाली 'ग्रुप फोटो' को रद्द कर दिया गया। इसकी मुख्य वजह रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की मौजूदगी पर यूरोपीय देशों का विरोध रहा। यह कूटनीतिक तनाव रूस-यूक्रेन संघर्ष और एनर्जी पॉलिसी को लेकर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच बढ़ती दरार को दर्शाता है।
अटलांटा में हुई इस बैठक में यूरोपीय प्रतिनिधियों ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ फ्रेम शेयर करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद यह प्रतीकात्मक फोटो सेशन रद्द कर दिया गया। यह घटना G20 के उन देशों के बीच बढ़ते गहरे मतभेदों को उजागर करती है, जो कभी वैश्विक आर्थिक सहयोग का केंद्र माने जाते थे।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए यह कूटनीतिक कलह एक बड़ा संकेत है। बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा अमेरिकी प्रशासन द्वारा रूसी डीजल पर आयात शुल्क (Tariffs) में दी गई छूट को लेकर रहा। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच एनर्जी ट्रेड फ्रेमवर्क पर असहमति ग्लोबल सप्लाई चेन में अनिश्चितता पैदा कर सकती है। एनर्जी और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर, जो रिफाइंड प्रोडक्ट्स पर निर्भर हैं, उन्हें अब नई पाबंदियों या टैरिफ में बदलाव की संभावनाओं पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
यह कोई पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है। इससे पहले सितंबर में एशविले में हुई फाइनेंस मिनिस्टर्स की मीटिंग में भी रूसी वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव को लेकर विवाद हुआ था। तब भी मतभेदों के चलते रूसी अधिकारी को अंतिम ग्रुप पोर्ट्रेट में शामिल नहीं किया गया था।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजरें दिसंबर में मियामी के ट्रंप नेशनल डोराल गोल्फ क्लब में होने वाले G20 लीडर्स समिट पर टिकी हैं। व्हाइट हाउस ने व्लादिमीर पुतिन को न्योता भेजा है, लेकिन उनकी उपस्थिति अभी कंफर्म नहीं है। जिस तरह से ग्लोबल इकोनॉमी एनर्जी मार्केट के उतार-चढ़ाव और जटिल ट्रेड डायनामिक्स से जूझ रही है, ऐसे में इस समिट का आउटकम अंतरराष्ट्रीय मार्केट सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकता है।
