Milwaukee में आयोजित G20 ट्रेड मिनिस्टर्स की मीटिंग में खाद्य आपूर्ति को राजनीतिक दबाव का हथियार बनाने के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। भारत के कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि देशों को अपनी घरेलू खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने का पूरा हक है और इसे किसी भी व्यापारिक दंड से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
ग्लोबल ट्रेड और सप्लाई चेन पर असर
30 सितंबर और 1 अक्टूबर, 2026 को मिलवौकी में हुई इस बैठक का मुख्य केंद्र 'फूड और फर्टिलाइजर' को लेकर चल रही जियो-पॉलिटिकल खींचतान थी। बाजार जानकारों के मुताबिक, खाने-पीने की जरूरी चीजों को हथियार बनाने से ग्लोबल मार्केट में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इस तरह के व्यापारिक प्रतिबंध सीधे तौर पर कंपनियों की लागत और ग्राहकों की जेब पर असर डालते हैं।
भारत का कड़ा रुख
पीयूष गोयल ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मौजूदा नियमों का हवाला देते हुए कहा कि भारत के ग्रेन डिस्ट्रीब्यूशन जैसे मानवीय कार्यक्रम पूरी तरह से घरेलू जरूरतों के लिए हैं। उन्होंने जोर दिया कि इन कदमों को बाजार को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह बयान उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है जो एग्री-कमोडिटी और फर्टिलाइजर सेक्टर पर नजर रखते हैं।
डिप्लोमेसी और भविष्य के संकेत
बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि के साथ भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर बातचीत की। इसके अलावा, ब्राजील, पोलैंड और मेक्सिको के साथ भी आर्थिक सहयोग और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई है। यदि 'घरेलू खाद्य सुरक्षा' और 'व्यापारिक बाधाओं' के बीच का अंतर स्पष्ट नहीं हुआ, तो आने वाले समय में WTO में विवाद बढ़ सकते हैं, जिससे ग्लोबल ट्रेड में अनिश्चितता पैदा होने का खतरा बना रहेगा।
