फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गाजा में शांति के अमेरिकी दावों पर सवाल उठाए हैं। पेरिस अब वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है, जिससे वैश्विक कूटनीति और बाजार में हलचल बढ़ गई है।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान गाजा संघर्ष पर अमेरिकी कूटनीतिक दावों की कड़ी आलोचना की है। जहां व्हाइट हाउस युद्ध खत्म होने और बंधकों की वापसी के अपने प्रयासों को सफल बता रहा है, वहीं मैक्रों ने इन दावों को जमीनी हकीकत से दूर बताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मानवीय सहायता के वादे पूरे नहीं हुए हैं, जिससे स्थानीय आबादी गंभीर संकट में है।
वेस्ट बैंक पर सख्त नीति के संकेत
गाजा के अलावा, फ्रांस अब वेस्ट बैंक में इजरायली गतिविधियों को लेकर भी कड़ा रुख अपना रहा है। राष्ट्रपति मैक्रों ने बस्तियों में हिंसा बढ़ने पर चिंता जताई है, जिसे उन्होंने फिलिस्तीनी राज्य की राह में बड़ी बाधा बताया। इसके परिणामस्वरुप, फ्रांस अब राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने और इजरायली बस्तियों से आने वाले उत्पादों पर बैन लगाने पर विचार कर रहा है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि आने वाले समय में व्यापारिक संबंधों और रेगुलेटरी माहौल में जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
भारत पर कूटनीतिक असर
संयुक्त राष्ट्र में यह टकराव पारंपरिक कूटनीति और अमेरिकी प्रशासन के एकतरफा दृष्टिकोण के बीच बढ़ते अंतर को दर्शाता है। भारतीय निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए यह स्थिति संवेदनशील है। भारत के फ्रांस और इजरायल दोनों के साथ गहरे रक्षा और सामरिक संबंध हैं। पेरिस और यरुशलम के बीच बढ़ता यह फासला भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन बनाने की चुनौती खड़ा कर सकता है।
बाजार के लिए क्या है रिस्क?
मार्केट के नजरिए से, प्रतिबंधों का विस्तार या क्षेत्रीय अस्थिरता अक्सर ग्लोबल कमोडिटी, विशेष रूप से ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता (Volatility) पैदा करती है। कूटनीतिक अस्थिरता सप्लाई चेन को बाधित कर सकती है और अंतरराष्ट्रीय निवेश पर रिस्क प्रीमियम बढ़ा सकती है। निवेशकों को इन ट्रेड प्रतिबंधों और अन्य यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यह भविष्य में बड़े ट्रेड बैरियर का रूप ले सकते हैं।
