फ्रांस में जारी अशांति के बीच **10-year** सरकारी बॉन्ड की यील्ड **2013** के बाद पहली बार अमेरिकी ट्रेजरी दरों से ऊपर निकल गई है। यह निवेशकों के बीच बढ़ती चिंता का संकेत है, जिसका असर भारतीय बाजार और FII निवेश पर भी पड़ सकता है।
फ्रांस में चल रही नागरिक अशांति ने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट को चिंता में डाल दिया है। पहली बार 2013 के बाद ऐसा हुआ है कि फ्रांस के सरकारी बॉन्ड की यील्ड अमेरिकी ट्रेजरी से ज्यादा हो गई है। इसका सीधा मतलब है कि निवेशक अब फ्रांस के कर्ज को रखने के लिए अमेरिका के मुकाबले ज्यादा रिस्क प्रीमियम की मांग कर रहे हैं।\n\n### 'फ्लाइट टू सेफ्टी' का दौर\nजब किसी देश का राजनीतिक माहौल बिगड़ता है, तो निवेशक अपना पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर ले जाने लगते हैं। इसे मार्केट की भाषा में 'फ्लाइट टू सेफ्टी' कहा जाता है। चूंकि US ट्रेजरी को दुनिया में सबसे सुरक्षित माना जाता है, इसलिए भारी मात्रा में पूंजी यूरोप से अमेरिका की ओर शिफ्ट हो रही है, जिससे फ्रांस के बॉन्ड की कीमतें गिरी हैं और यील्ड ऊपर चढ़ गई है।\n\n### लग्जरी ब्रांड्स और भारतीय बाजार पर असर\nयह अशांति दुनिया के बड़े लग्जरी ब्रांड्स जैसे LVMH, Kering और Hermes के लिए सिरदर्द बन गई है। फ्रांस इन ब्रांड्स का मुख्य केंद्र है और वहां की सुरक्षा व्यवस्था का असर सीधे इन कंपनियों के कामकाज और सेल्स पर पड़ सकता है।\n\nभारतीय निवेशकों के लिए, सबसे जरूरी बात FII (Foreign Institutional Investor) का रुख देखना है। ग्लोबल मार्केट में रिस्क बढ़ते ही FII अक्सर उभरते बाजारों (Emerging Markets) जैसे भारत से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं ताकि वे अपने घाटे की भरपाई कर सकें। अगर यूरोप में यह अस्थिरता लंबी खिंची, तो भारतीय इंडेक्स पर भी दबाव देखने को मिल सकता है।\n\n### आगे क्या देखें?\nनिवेशकों को अब Euro की चाल, फ्रांस की राजनीतिक स्थिति और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर नजर रखनी होगी। अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती है, तो ग्लोबल पोर्टफोलियो में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
