फ्रांस में छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और बजट कटौती के विरोध में जगह-जगह आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
फ्रांस में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती भीड़ के खिलाफ शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब हिंसा की भेंट चढ़ चुका है। मार्सेई (Marseille) और नान्तेस (Nantes) जैसे शहरों से स्कूलों में आगजनी की खबरें हैं, जहां आग बुझाने पहुंचे आपातकालीन कर्मियों पर भी हमले किए गए हैं।
सरकार पर बढ़ता दबाव
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू (Sébastien Lecornu) की सरकार के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार 2027 के उस बजट को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है, जिसमें भारी खर्च कटौती का प्रस्ताव है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की कड़ी निंदा की है, लेकिन साथ ही उन्होंने छात्रों की बुनियादी मांगों को जायज भी माना है। विपक्ष इस पूरे मामले को सरकार की विफलता बता रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर चोट
हालात इतने बिगड़ गए हैं कि स्ट्रासबर्ग (Strasbourg) और ग्रेनोबल (Grenoble) जैसे बड़े शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट पूरी तरह ठप कर दिया गया है। प्रशासन ने स्कूलों को ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। अब तक पुलिस ने 600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
बाजार के जानकारों का मानना है कि यूरोप की बड़ी अर्थव्यवस्था में ऐसी अस्थिरता निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। हालांकि यह विरोध स्थानीय शिक्षा बजट से जुड़ा है, लेकिन इससे बिजनेस सेंटीमेंट और सरकारी फैसलों पर असर पड़ना तय है। अब देखना यह है कि क्या सरकार छात्रों से बातचीत कर व्यवस्था बहाल कर पाएगी या यह विवाद और गहराएगा।
