फ्रांस में शिक्षा के बजट और बुनियादी ढांचे को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक हजारों गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और सैकड़ों स्कूल बंद हैं। लेबर यूनियन्स के इसमें शामिल होने से आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
फ्रांस इस समय जबरदस्त सामाजिक अशांति के दौर से गुजर रहा है। छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है। प्रदर्शनकारी स्कूलों की जर्जर हालत, शिक्षकों की कमी और बजट के गलत वितरण का विरोध कर रहे हैं। इस आंदोलन के चरम पर करीब 400 स्कूल बंद करने पड़े, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर भारी असर पड़ा है।
बजट पर सवाल
सरकार ने साल 2027 के बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए 65.5 अरब यूरो का प्रावधान किया है। हालांकि, छात्रों और फैकल्टी का कहना है कि यह फंड जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहा है। स्कूलों में फर्नीचर टूटने और इमारतों के रखरखाव में कमी की शिकायतों ने युवाओं के गुस्से को और भड़का दिया है।
आर्थिक और राजनीतिक जोखिम
मैक्रोइकोनॉमिक नजरिए से देखें तो यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब बड़े लेबर यूनियंस भी इन प्रदर्शनों में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। यदि छात्र आंदोलन और श्रमिक संगठन एक साथ आ जाते हैं, तो सार्वजनिक सेवाओं के बाधित होने और स्थानीय अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने का जोखिम काफी बढ़ जाएगा।
आगे की राह
आगामी 6 अक्टूबर को देशभर में होने वाले मोबिलाइजेशन पर सभी की निगाहें टिकी हैं। चुनावी माहौल के बीच, विपक्षी दल इसे सरकार की नीतिगत विफलता बता रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे शहरी अव्यवस्था का नाम दे रहा है। निवेशकों और बाजार के लिए अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या सरकार स्थिति को काबू कर पाएगी या देश की उत्पादकता पर इसका गहरा नकारात्मक असर पड़ेगा।
