फ्रांस में छिड़े बड़े पैमाने के विरोध-प्रदर्शनों ने आम जनजीवन और बाजार की गतिविधियों को ठप कर दिया है। पेरिस समेत प्रमुख शहरों में स्टोर बंद होने और मेट्रो सेवाओं में बाधा से लग्जरी और रिटेल कंपनियों पर रिस्क बढ़ गया है।
फ्रांस में इस समय हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों की संख्या 4,10,000 से लेकर 8,00,000 तक आंकी जा रही है। इसका सीधा असर पेरिस, मार्सिले और ल्यों जैसे बड़े शहरों के व्यापारिक केंद्रों पर पड़ रहा है। निवेशकों की चिंता इस बात को लेकर है कि क्या यह अस्थिरता फ्रांस के लग्जरी और रिटेल सेक्टर के लिए बड़ा झटका साबित होगी।\n\nदुनिया के दिग्गज लग्जरी ब्रांड्स का मुख्यालय फ्रांस में ही है। हालांकि ये कंपनियां अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा इंटरनेशनल मार्केट से जुटाती हैं, लेकिन पेरिस जैसे शहरों में उनके स्टोर और ऑपरेशंस काफी बड़े हैं। अतीत में देखा गया है कि ऐसी अशांति के दौरान स्टोर बंद होने और फुटफॉल घटने से शॉर्ट-टर्म रेवेन्यू पर असर पड़ता है।\n\nसरकार ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की है और पेरिस में 20 से अधिक मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। रिटेलर्स के लिए यह लॉजिस्टिक के मोर्चे पर बड़ी चुनौती है। दुकानों को सुरक्षा कारणों से बंद करना पड़ रहा है, जिससे कंज्यूमर स्पेंडिंग सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।\n\nग्लोबल मार्केट पर नजर रखने वाले निवेशक अब इस बात का आकलन कर रहे हैं कि यह घरेलू अशांति बाजार के मूड को कितना बिगाड़ सकती है। फिलहाल 31 अक्टूबर को एक और बड़े विरोध-प्रदर्शन की तारीख तय है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां अपने ऑपरेशंस और सप्लाई चेन को इस माहौल में कैसे मैनेज करती हैं।
