अफगानिस्तान के नूरीस्तान में बाढ़ का कहर: 23 की मौत, 100 से ज्यादा लापता

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
अफगानिस्तान के नूरीस्तान में बाढ़ का कहर: 23 की मौत, 100 से ज्यादा लापता

पूर्वी अफगानिस्तान के नूरीस्तान प्रांत में भयानक बाढ़ ने कम से कम 23 लोगों की जान ले ली है, और 100 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है। यह विनाशकारी घटना ऐसे समय में हुई है जब यह क्षेत्र पहले से ही जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाओं की मार झेल रहा है, जिससे वहां की कमजोर बुनियादी ढांचा और आर्थिक स्थिरता पर चिंताएं बढ़ गई हैं।

Detailed Coverage

नूरीस्तान में बाढ़ का विकराल रूप

पूर्वी अफगानिस्तान के नूरीस्तान प्रांत में सोमवार को अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस भयावह घटना में अब तक कम से कम 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। मलबे और कीचड़ के बड़े ढेर के कारण बचाव कार्य में भारी मुश्किलें आ रही हैं। तेज बारिश ने रिहायशी इलाकों और स्थानीय बुनियादी ढांचे को बुरी तरह तबाह कर दिया है।

बाढ़ का असर: इंफ्रास्ट्रक्चर और रिकवरी

प्रांतीय राजधानी पारुन सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है, जहां 80 लोग घायल हुए हैं। पानी के तेज बहाव के कारण कई इमारतें ढह गईं। बचाव दल और स्थानीय स्वयंसेवक भारी मशीनों और हाथों की मदद से रास्तों को साफ कर रहे हैं और फंसे हुए लोगों की तलाश कर रहे हैं। घरों और दुकानों के नुकसान से स्थानीय आबादी के लिए तत्काल मानवीय और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, खासकर तब जब यह क्षेत्र पहले से ही विकास और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है।

जलवायु जोखिम और आर्थिक कमजोरी का चक्र

यह आपदा अफगानिस्तान में बार-बार होने वाली चरम मौसम की घटनाओं के पैटर्न में एक और कड़ी है। 2024 की शुरुआत में आई बाढ़ में 300 से अधिक लोगों की जान गई थी, और इसी साल पहले एक अन्य घटना में कम से कम 110 लोगों की मौत हुई थी। विश्लेषक और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इन आपदाओं की गंभीरता के पीछे कई कारण बताते हैं, जिनमें लंबे समय से अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव शामिल है।

परिवहन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 10 प्रांतों में भारी बारिश, गरज और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। नागरिकों को नदियों के किनारे और बाढ़ संभावित इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए, ऐसी घटनाओं की आवृत्ति कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों को बनाए रखने में आने वाली कठिनाइयों को उजागर करती है। लगातार हो रहे नुकसान के कारण विकास बाधित होता है और पुनर्निर्माण की लागत बढ़ जाती है, जबकि देश पहले से ही गहरी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है।

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