सुरक्षा बलों ने कश्मीर घाटी में लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के चार सदस्यों वाली सेल के आखिरी आतंकी हाशिम मूसा को ढेर कर दिया है। करीब एक साल से चल रहे इस ऑपरेशन के खत्म होने से घाटी की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, जो टूरिज्म और बिजनेस गतिविधियों के लिए बेहद जरूरी है।
एक साल की मुहिम का अंत
सुरक्षा बलों ने 29 सितंबर को पलमैदान इलाके में एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए हाशिम मूसा को मार गिराया। यह लश्कर-ए-तैयबा की उस चार सदस्यीय सेल का आखिरी हिस्सा था, जिसने पहलगाम और गांदरबल हमलों के जरिए घाटी में दहशत फैलाने की कोशिश की थी। इस कामयाबी ने पिछले एक साल से जारी एक गहन सर्च ऑपरेशन पर पूर्णविराम लगा दिया है।
इकोनॉमिक आउटलुक पर असर
घाटी में सुरक्षा का बेहतर होना सीधे तौर पर बिजनेस और इकोनॉमिक एक्टिविटी से जुड़ा है। टूरिज्म, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और छोटे ट्रेडर्स के लिए एक सुरक्षित वातावरण पहली शर्त है। जब सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता कम होती है, तो इनवेस्टर्स का भरोसा बढ़ता है और टूरिज्म जैसे सेक्टर्स में रौनक लौटती है। इस आतंकी सेल का सफाया वहां के बिजनेस एनवायरमेंट को और ज्यादा 'Predictable' बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
कैसे काम किया सुरक्षा बलों ने?
इस ऑपरेशन में इंटेलीजेंस-लेड काउंटर-टेररिज्म के नए आयाम देखने को मिले। बलों ने ड्रोन मॉनिटरिंग और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर जैसी एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया। पीर पंजाल और दचीगाम के दुर्गम जंगलों में ट्रैक करने के बाद यह सफलता हाथ लगी। 2024 के अंत में जुनैद अहमद भट के खात्मे के बाद से ही इस पूरे नेटवर्क की कमर टूटनी शुरू हो गई थी।
आगे का रास्ता
हालांकि यह सेल अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां भविष्य के लिए भी अलर्ट हैं। घाटी में नॉर्मलसी (Normalcy) बनाए रखना और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सुरक्षा देना अब प्राथमिकता रहेगी, ताकि कश्मीर में लॉन्ग टर्म इकोनॉमिक ग्रोथ का रास्ता साफ हो सके।
