फ्रांस में देशव्यापी हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों के बीच मशहूर Eiffel Tower को बंद कर दिया गया है। बढ़ती महंगाई और पेंशन सुधारों के खिलाफ हो रहे ये प्रदर्शन फ्रांस में पब्लिक सर्विसेज को ठप कर रहे हैं और 2027 के राष्ट्रपति चुनावों से पहले सरकार की स्थिरता की परीक्षा ले रहे हैं।
दुनिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक, Eiffel Tower ने गुरुवार को अपने दरवाजे पर्यटकों के लिए बंद कर दिए। यह कदम देशभर में चल रही उस हड़ताल का हिस्सा है, जिसने फ्रांस की बुनियादी सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। ट्रेड यूनियन्स और छात्र समूह वेतन में बढ़ोतरी, जीवन यापन की बढ़ती लागत और एजुकेशन फंडिंग की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं।\n\nइस स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे देश में लगभग 70,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। हालांकि प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण हैं, लेकिन बड़े शहरी केंद्रों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।\n\n### अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?\n\nफ्रांस की अर्थव्यवस्था पहले ही महंगाई के दबाव में है। इन प्रदर्शनों का सीधा असर टूरिज्म सेक्टर पर पड़ रहा है, जो कि देश की जीडीपी के लिए काफी महत्वपूर्ण है। अगर यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो सरकारी नीतियों और सुधारों को लागू करने की प्रक्रिया में देरी हो सकती है, जिससे मार्केट सेंटीमेंट पर नकारात्मक असर पड़ने की पूरी आशंका है।\n\n### राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के लिए बड़ी चुनौती\n\nयह अशांति राष्ट्रपति Emmanuel Macron की सरकार के लिए एक बड़े टेस्ट की तरह है। चूंकि वे तीसरा कार्यकाल नहीं ले सकते, इसलिए 2027 के प्रेसिडेंशियल इलेक्शन की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। विपक्ष इस मौके का फायदा उठाकर सरकार की कमजोरियों को भुनाने की कोशिश कर रहा है। निवेशकों के लिए, यूरोप की इस बड़ी अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिसे ग्लोबल मार्केट एक्सपर्ट्स काफी बारीकी से ट्रैक कर रहे हैं।
