साल **2025** में संघर्ष और खराब मौसम के कारण East Africa में **62 लाख** लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए। साल **2026** तक **4.85 करोड़** लोगों को मदद की जरूरत है, जिससे सप्लाई चेन और ट्रेड स्टेबिलिटी पर गहरा असर पड़ सकता है।
साल 2025 में East Africa में मानवीय स्थिति बेहद नाजुक स्तर पर पहुंच गई है। संघर्ष और मौसम की मार के कारण विस्थापन का आंकड़ा 62 लाख तक पहुंच गया है, जिससे 9 देशों में भारी अस्थिरता देखी जा रही है। अब 2026 के मध्य तक स्थिति और गंभीर हो गई है, जहां लगभग 4.85 करोड़ लोगों को जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता की सख्त जरूरत है।
संघर्ष और जलवायु का 'डबल अटैक'
यह संकट सशस्त्र संघर्ष और जलवायु संबंधी आपदाओं का मिला-जुला परिणाम है। Sudan, South Sudan और Ethiopia में सबसे अधिक विस्थापन हुआ है, जो कुल आंकड़ों का लगभग 90% हिस्सा है। Sudan में युद्ध ने बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। इसके अलावा, भीषण गर्मी और बाढ़ ने सड़कों, पुलों और पानी की व्यवस्था को नष्ट कर दिया है।
आने वाले समय के लिए जलवायु मॉडल चेतावनी दे रहे हैं कि 'El Niño' का प्रभाव 2027 की शुरुआत तक बना रह सकता है। जानकारों के मुताबिक, इसके चलते Somalia, Kenya, South Sudan और Uganda में बाढ़ से 7.5 लाख से 30 लाख और लोग विस्थापित हो सकते हैं।
इकोनॉमी और ट्रेड पर असर
निवेशकों और ग्लोबल मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए यह एक बड़ा आर्थिक जोखिम है। इस समय 4 करोड़ से अधिक लोग खाद्य असुरक्षा (food insecurity) का सामना कर रहे हैं। खेती पैदावार में कमी से 'फूड इन्फ्लेशन' का खतरा बढ़ गया है।
खासकर Kenya जैसे देशों की इकोनॉमी पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबी है, जिससे उनके पास इंफ्रास्ट्रक्चर मरम्मत के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो रहा है। कर्ज का बोझ और मानवीय संकट मिलकर राजकोषीय लचीलेपन को सीमित कर रहे हैं। आने वाले समय में इन देशों का आर्थिक विकास और सप्लाई चेन स्टेबिलिटी, इस बात पर निर्भर करेगी कि वे जलवायु झटकों और आर्थिक दबावों को कैसे मैनेज करते हैं।
