यूरोपीय देशों के आंतरिक मंत्री म्यूनिख में एक अहम बैठक कर रहे हैं, जिसका मकसद अवैध प्रवासियों की वापसी के लिए नई 'फास्ट-ट्रैक' प्रक्रिया को अंतिम रूप देना है। पिछले दो सालों में अवैध प्रवासन में **55%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसे देखते हुए अब बॉर्डर मैनेजमेंट और सख्त किया जा रहा है।
म्यूनिख में क्या हो रहा है मंथन?
म्यूनिख में आयोजित इस समिट में यूरोपीय देशों के साथ-साथ यूनाइटेड किंगडम के प्रतिनिधि भी शामिल हुए हैं। बातचीत का मुख्य केंद्र बॉर्डर मैनेजमेंट को बेहतर बनाना है। इसके तहत हालिया 'EU Migration and Asylum Pact' के दायरे में उन लोगों की वापसी की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जा रहा है, जिनका असाइलम (Asylum) आवेदन खारिज कर दिया गया है।
क्राइसिस मैकेनिज्म और Frontex की भूमिका
जर्मनी के इंटीरियर मिनिस्टर अलेक्जेंडर डोब्रिंड्ट ने एक 'यूरोपीय माइग्रेशन क्राइसिस मैकेनिज्म' बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका लक्ष्य अवैध क्रॉसिंग में अचानक होने वाले उछाल से निपटना है। इस प्रक्रिया में Frontex (यूरोपीय बॉर्डर और कोस्ट गार्ड एजेंसी) की भूमिका को और अधिक सक्रिय बनाया जाएगा, ताकि अलग-अलग देशों की नीतियों के बजाय पूरे यूरोप में एक समान और सख्त बॉर्डर कंट्रोल लागू हो सके।
माइग्रेशन का डेटा और मार्केट पर असर
EU माइग्रेशन कमिश्नर मैग्नस ब्रूनर के अनुसार, पिछले दो सालों में अवैध प्रवासन में 55% की कमी आई है, और पिछले एक साल में इसमें 33% (एक-तिहाई) की और गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, भूमध्य सागर (Mediterranean) के रास्ते खतरनाक होते जा रहे हैं, जिस पर अधिकारी लगातार नजर रखे हुए हैं।
निवेशकों और बिजनेस वर्ल्ड के लिए यह खबर इसलिए मायने रखती है क्योंकि यूरोप की राजनीतिक स्थिरता सीधे तौर पर वहां के ट्रेड एग्रीमेंट्स और आर्थिक स्वास्थ्य से जुड़ी है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि कैसे सदस्य देश अपने स्थानीय कानूनों को इन नए EU सुधारों के साथ तालमेल बिठाते हैं, क्योंकि यही फैक्टर यूरोप की भविष्य की आर्थिक निरंतरता के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा।
