भारत और डेनमार्क के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के बीच, डेनमार्क ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। देश में पहले से ही **250** से ज्यादा डेनिश कंपनियां काम कर रही हैं, जो **1 लाख** से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं।
कूटनीति के साथ मजबूत होती इकोनॉमी
डेनमार्क का यह औपचारिक समर्थन कोपेनहेगन और नई दिल्ली के बीच बढ़ते गहरे संबंधों को दर्शाता है। निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम एक बड़े आर्थिक कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है, जो लगातार यूरोपियन कैपिटल को भारतीय बाजार की ओर आकर्षित कर रहा है।
भारत में डेनिश कंपनियों का दबदबा
वर्तमान में, भारत में 250 से अधिक डेनिश फर्म्स अपना कामकाज संभाल रही हैं। ये कंपनियां हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स जैसे सेक्टरों में सक्रिय हैं। इनका कुल वर्कफोर्स 1 लाख से ज्यादा है, जो दर्शाता है कि डेनिश कंपनियां भारत को अपने ग्लोबल ऑपरेशन्स का प्रमुख हब मान रही हैं।
इंडिया-EU FTA: एक बड़ा गेम-चेंजर
मार्केट एनालिस्ट्स की नजरें अब इंडिया-यूरोपीय यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर टिकी हैं। यदि यह समझौता फाइनल होता है, तो यह एक्सपोर्ट प्रोसेस को आसान बनाएगा और ट्रेड बैरियर्स को कम करेगा। इससे फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
इंफ्रास्ट्रक्चर में भी भागीदारी
केवल ट्रेड ही नहीं, बल्कि डेनमार्क भारत के 'जल जीवन मिशन' में भी तकनीकी मदद दे रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी और टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) में सहयोग से आने वाले समय में नई कंपनियों के लिए विस्तार के रास्ते और साफ होंगे। हालांकि, निवेशकों को FTA की प्रगति और लेबर मोबिलिटी से जुड़े नियमों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
