हाल ही में डीक्लासिफाई हुए खुफिया दस्तावेजों से पता चला है कि 9/11 हमले से कई साल पहले ही अमेरिकी नेतृत्व को अल-कायदा की साजिशों के बारे में बार-बार चेतावनी दी गई थी। इनमें विमान अपहरण और जैविक हमलों के खतरों की विस्तृत जानकारी शामिल थी।
हाल ही में जारी किए गए प्रेसिडेंशियल इंटेलिजेंस ब्रीफिंग के दस्तावेजों ने 9/11 के आतंकवादी हमलों से पहले की स्थिति पर नई रोशनी डाली है। ये दस्तावेज साफ करते हैं कि अमेरिकी एजेंसियां हमले से काफी पहले से ही ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं।
क्या थे चेतावनी के संकेत?
दस्तावेजों के अनुसार, साल 1998 में ही खुफिया रिपोर्टों ने कमर्शियल विमानों और केमिकल या बायोलॉजिकल हथियारों के इस्तेमाल के खतरों की पहचान कर ली थी। दिसंबर 1998 तक अधिकारियों के पास इस बात के ठोस सबूत थे कि आतंकवादी नेटवर्क ने हाइजैकिंग की ट्रेनिंग ली थी और न्यूयॉर्क के एयरपोर्ट्स पर इसके ट्रायल रन भी किए थे।
सिस्टम की विफलता और कम्युनिकेशन गैप
इन दस्तावेजों का एक बड़ा हिस्सा क्लिंटन और बुश प्रशासन के बीच के ट्रांजिशन और खुफिया समुदाय की आंतरिक चुनौतियों पर केंद्रित है। साल 2001 के मध्य तक, FBI इस नेटवर्क से जुड़ी करीब 70 सक्रिय जांच कर रही थी। हालांकि, फाइलों से यह भी उजागर हुआ कि FBI और CIA के बीच जानकारी साझा करने में भारी कमी थी। एजेंसियों के बीच यह 'साइलो' (Silos) सिस्टम बाद में 9/11 कमीशन की रिपोर्ट का मुख्य बिंदु बना।
भविष्य के लिए सुधार
इन खुलासों के बाद ही अमेरिका में संस्थागत सुधारों की नींव पड़ी, जिसके तहत 'डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस' और 'नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर' का गठन हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच डेटा का समन्वय करना था ताकि भविष्य में ऐसी चूक न हो।
