भूख का राक्षस बेकाबू! संघर्ष, घटता चंदा और अंधेरे में छिपे आंकड़े - नई रिपोर्ट का खुलासा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भूख का राक्षस बेकाबू! संघर्ष, घटता चंदा और अंधेरे में छिपे आंकड़े - नई रिपोर्ट का खुलासा
Overview

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में भुखमरी का संकट गहराता जा रहा है। अब संघर्ष (Conflict) दुनिया भर में लोगों को भूखा मारने का सबसे बड़ा कारण बन गया है, जिसने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट बताती है कि **266 मिलियन** से ज़्यादा लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा (Severe Food Insecurity) का सामना कर रहे हैं। इस संकट को मानवीय सहायता के लिए मिलने वाली फंडिंग में भारी गिरावट ने और गंभीर बना दिया है, जो **2016-2017** के स्तर पर आ गई है। वहीं, प्रमुख एजेंसियों द्वारा डेटा संग्रह में कटौती से एक खतरनाक 'ब्लाइंड स्पॉट' बन गया है, जिससे संकट की असली भयावहता छिप रही है।

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संघर्ष का बढ़ता कहर: भुखमरी का मुख्य कारण बना

वैश्विक खाद्य सुरक्षा (Global Food Security) का परिदृश्य काफी बदल गया है। अब संघर्ष और अस्थिरता, जलवायु संबंधी घटनाओं से भी ज़्यादा, गंभीर भुखमरी के मुख्य कारण बन गए हैं। 'ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस 2026' के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 19 ऐसे देश थे जहाँ संघर्ष भुखमरी का मुख्य कारण बना, जिससे 147.4 मिलियन लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे थे। यह पिछले कुछ सालों के मुकाबले एक बड़ी बढ़ोतरी है और एक दशक पहले के हालात से बिल्कुल अलग है, जब मौसम की मार सबसे बड़ा कारण हुआ करती थी। हालांकि, अभी भी चरम मौसमी घटनाओं ने 16 देशों में 87.5 मिलियन लोगों को प्रभावित किया है, लेकिन लंबे समय से चल रहे युद्धों और अस्थिरता ने खाद्य प्रणालियों को बुरी तरह तबाह कर दिया है। यह बदलाव एक ज़्यादा मुश्किल चुनौती पेश करता है, जिसके लिए आपदा प्रतिक्रिया (Disaster Response) से आगे बढ़कर शांति निर्माण (Peacebuilding) और संघर्ष समाधान (Conflict Resolution) पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है। अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, म्यांमार, नाइजीरिया, दक्षिण सूडान, सूडान, सीरिया और यमन जैसे सिर्फ दस देशों में संकट का ज़्यादातर केंद्रित होना, इन संघर्ष-प्रेरित मानवीय आपात स्थितियों की गहरी जड़ें दिखाता है।

सहायता राशि में भारी कटौती: संकट को और गहराया

बढ़ती ज़रूरतों के बीच, संकटग्रस्त इलाकों में मानवीय और विकास संबंधी फंडिंग (Humanitarian and Development Funding) में भारी गिरावट आई है। फंडिंग का स्तर गिरकर इतना कम हो गया है कि यह 2016-2017 के दौर जैसा है, जबकि तब से भुखमरी का स्तर दोगुना हो चुका है। यह गिरावट वैश्विक सहायता में कमी की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है। 'वर्ल्ड फूड प्रोग्राम' (WFP) जैसी संस्थाएं गंभीर फंडिंग की कमी की रिपोर्ट कर रही हैं, जिसके कारण लाखों ज़रूरतमंदों, खासकर 'इमरजेंसी' (IPC Phase 4) स्थितियों में जी रहे लोगों को मिलने वाली सहायता में भारी कटौती करनी पड़ रही है। उदाहरण के लिए, WFP के 2025 के लिए अनुमानित संसाधन 2024 की तुलना में 34% कम होने की उम्मीद है, जिससे सहायता प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या में 21% की कमी आएगी। बढ़ती ज़रूरतों और घटते संसाधनों के बीच यह बड़ा फासला, सरकारों और सहायता एजेंसियों की प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता को बुरी तरह सीमित कर रहा है, जिससे कुपोषण से लड़ने और व्यापक भुखमरी को रोकने के प्रयासों को खतरा हो रहा है। वित्तीय ज़रूरतों का पैमाना बहुत बड़ा है; कृषि और खाद्य प्रणालियों को टिकाऊ और मज़बूत बनाने के लिए सालाना अनुमानित $1.3 ट्रिलियन की ज़रूरत है, जो मौजूदा मानवीय आवंटन से कहीं ज़्यादा है।

डेटा की कमी: संकट की तस्वीर धुंधली

वैश्विक भुखमरी के आंकलन की सटीकता और पूर्णता, डेटा संग्रह के घटते दायरे के कारण लगातार खतरे में है। '2026 ग्लोबल रिपोर्ट ऑन फूड क्राइसिस' में अपने दस साल के इतिहास में सबसे कम देशों को शामिल किया गया है, क्योंकि 18 देश रिपोर्ट की तकनीकी ज़रूरतों को पूरा करने वाला डेटा प्रदान करने में असमर्थ रहे। WFP और 'फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन' (FAO) जैसे प्रमुख डेटा प्रदाताओं ने सर्वेक्षण साक्षात्कारों (Survey Interviews) की संख्या में काफी कटौती की है, WFP ने 2025 में 30% की कमी बताई है, जबकि FAO ने 31% की कटौती की है। डेटा संग्रह में यह कमी न केवल संकट के पूर्ण पैमाने की दृश्यता को सीमित करती है, बल्कि भविष्य के वैश्विक भुखमरी आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता को भी खतरे में डालती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि 'यू.एस. डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर' (USDA) की वार्षिक खाद्य सुरक्षा रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण डेटा संग्रह प्रयासों के रद्द होने से नीति निर्माताओं के लिए परिवारों की स्थिति का मूल्यांकन करना, नीतिगत निर्णयों के प्रभाव को ट्रैक करना और प्रगति को प्रभावी ढंग से मापना कठिन हो गया है। डेटा की यह कमी एक महत्वपूर्ण 'ब्लाइंड स्पॉट' बनाती है, जिससे रुझानों की पहचान करना, संसाधनों को कुशलतापूर्वक आवंटित करना और हितधारकों को जवाबदेह ठहराना मुश्किल हो जाता है, और एक छिपे हुए संकट का खतरा बढ़ जाता है जिसे अनदेखा करना आसान और संबोधित करना कठिन होता है।

प्रणालीगत पतन का खतरा और अंधकारमय भविष्य

बढ़ते संघर्ष-प्रेरित भुखमरी, सहायता फंडिंग में कमी और डेटा की अखंडता के क्षरण का संयोजन एक अंधकारमय तस्वीर पेश करता है। यदि फंडिंग 2016 के स्तर तक गिरती रही, जबकि ज़रूरतों में भारी वृद्धि हुई, तो मानवीय प्रणालियाँ प्रयासों को भारी पड़ने का जोखिम उठाती हैं, जिससे महत्वपूर्ण सहायता का व्यापक निलंबन हो सकता है। सर्वेक्षणों में कमी और राष्ट्रीय डेटा संग्रह के बंद होने का मतलब है कि खाद्य असुरक्षा की वास्तविक सीमा तेजी से अस्पष्ट होती जाएगी, जिससे नीति निर्माताओं के लिए बढ़ते मुद्दों को अनदेखा करना आसान हो जाएगा। समय पर, विश्वसनीय डेटा की यह कमी प्रभावी हस्तक्षेप और मूल्यांकन को रोकती है, जिससे एक ऐसी स्थिति पैदा होती है जहाँ हस्तक्षेप प्रतिक्रियात्मक होते हैं, न कि सक्रिय। संघर्ष का निरंतर बने रहना, जो अब मुख्य चालक है, इसका मतलब है कि भले ही मौसम के पैटर्न स्थिर हो जाएं, मानवीय कीमत बढ़ती रहेगी। फंडिंग में महत्वपूर्ण, निरंतर वृद्धि और डेटा अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता के बिना, दुनिया गहरे संकट के चक्र में फंसने का जोखिम उठाती है, जहाँ भुखमरी एक अस्थायी आपातकाल नहीं बल्कि वैश्विक अस्थिरता की एक स्थायी विशेषता बन जाती है, जिससे 2030 तक 'ज़ीरो हंगर' (Zero Hunger) के लक्ष्य को प्राप्त करना और भी मुश्किल हो जाता है। आगे देखते हुए, वैश्विक खाद्य सुरक्षा का दृष्टिकोण अनिश्चित बना हुआ है। जारी संघर्ष, लगातार जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, 2026 के दौरान कई देशों में परिस्थितियों को बनाए रखने या खराब करने का अनुमान है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि गंभीर तीव्र खाद्य असुरक्षा कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बनी रहेगी, जिससे वैश्विक खाद्य बाजारों के लिए जोखिम बढ़ सकता है, खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव पड़ सकता है। सहायता एजेंसियां ​​चेतावनी देती हैं कि दृष्टिकोण में बड़े बदलाव के बिना - प्रतिक्रियाशील सहायता से हटकर शुरुआती कार्रवाई, स्थानीय खाद्य उत्पादन की सुरक्षा और संघर्ष के मूल कारणों को संबोधित करने की ओर - दुनिया गहरे संकट के चक्र में फंसने का जोखिम उठाती है। 2030 तक भुखमरी को समाप्त करने की आकांक्षा अब एक कठिन लक्ष्य प्रतीत होती है, जिसमें वर्तमान रुझान बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर कम भुखमरी के स्तर को अगली सदी में ही प्राप्त किया जा सकता है।

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