2026 SCO समिट के दौरान Xi Jinping और Vladimir Putin के बीच वीजा-फ्री ट्रैवल को परमानेंट बनाने पर चर्चा हुई है। टूरिज्म में आई **43%** की भारी बढ़ोतरी के बाद दोनों देश अब प्रशासनिक रुकावटों को खत्म करने की योजना बना रहे हैं।
चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने बिश्केक में आयोजित 2026 SCO समिट के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य केंद्र दोनों देशों के बीच वीजा-फ्री ट्रैवल को 'परमानेंट' पॉलिसी में बदलना रहा। यह कदम उस बढ़ती मोबिलिटी को आसान बनाने के लिए उठाया जा रहा है जो हाल के महीनों में रिकॉर्ड स्तर पर देखी गई है।
आंकड़ों की जुबानी (Data Insight)
साल 2026 की पहली छमाही के आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर टूरिस्ट ट्रैफिक में 43% का जबरदस्त उछाल आया है। फिलहाल जो वीजा-फ्री एग्रीमेंट लागू है, उसके तहत नागरिक 30 दिन तक बिना वीजा के रह सकते हैं। यह एग्रीमेंट साल 2027 के अंत तक प्रभावी है, लेकिन अब सरकारें इसे हमेशा के लिए लागू कर प्रशासनिक अनिश्चितता को जड़ से खत्म करना चाहती हैं।
बिजनेस और इकोनॉमी पर असर
इस परमानेंट व्यवस्था से एविएशन, हॉस्पिटैलिटी और ट्रेड सेक्टर्स को बड़ा बूस्ट मिल सकता है। जब बार-बार रिन्यूअल की टेंशन नहीं होगी, तो बिजनेस ट्रैवल और प्रोफेशनल एक्सचेंज और ज्यादा सुगम हो जाएंगे। निवेशकों को इस बात पर गौर करना चाहिए कि यह फैसला केवल टूरिज्म नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों के ट्रेड फ्रेमवर्क पर निर्भरता कम करने की एक बड़ी रणनीतिक चाल भी है।
हालांकि, यह अभी एक प्रस्ताव है। इसकी सफलता दोनों देशों के राजनीतिक तालमेल पर निर्भर करेगी। भू-राजनीतिक दबाव या कूटनीतिक बदलाव की स्थिति में भविष्य में इसमें कोई प्रशासनिक बदलाव हो सकता है, जिस पर नजर रखना जरूरी है।
