2020 के गलवान घाटी संघर्ष के दौरान Western Theatre Command का नेतृत्व करने वाले जनरल Zhao Zongqi को उनके राजनीतिक पदों से हटा दिया गया है। चीन की सेना में चल रहे बड़े सुधारों और जांच के बीच यह फैसला भारत के निवेशकों के लिए भी अहम है, क्योंकि यह क्षेत्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक अस्थिरता की ओर इशारा करता है।
चीन सरकार ने जनरल Zhao Zongqi की सदस्यता को CPPCC (Chinese People's Political Consultative Conference) से खत्म कर दिया है और उन्हें सभी राजनीतिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। भारत के लिए जनरल Zhao का नाम 2017 के डोकलाम स्टैंडऑफ और 2020 के गलवान संघर्ष के दौरान अपनी आक्रामक नीतियों के लिए चर्चित रहा है।
सेना में बड़े स्तर पर कार्रवाई
यह कदम चीन की सेना के शीर्ष नेतृत्व में चल रही उथल-पुथल का हिस्सा है। 28 अगस्त 2026 को Central Military Commission ने अनुशासन और कानूनों के उल्लंघन की जांच के तहत Zhang Youxia और Liu Zhenli जैसे दिग्गजों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया था। राष्ट्रपति Xi Jinping द्वारा शुरू किए गए इस भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान के तहत अब तक 100 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
भारतीय शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि LAC (Line of Actual Control) पर तनाव हमेशा से मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित करता रहा है, खासकर डिफेंस सेक्टर और सप्लाई चेन सिक्योरिटी के मामले में। हालांकि किसी एक कमांडर के हटने से तुरंत चीन की सीमा नीति नहीं बदलेगी, लेकिन बड़े स्तर पर सेना का पुनर्गठन यह संकेत देता है कि चीन का ध्यान फिलहाल आंतरिक सुधारों पर है।
ऐसी अनिश्चितता का असर लंबे समय की आर्थिक प्लानिंग और ट्रेड रिलेशंस पर पड़ सकता है। निवेशकों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि Western Theatre Command का नया नेतृत्व सीमा सुरक्षा और PLA की रणनीतिक खरीद नीतियों में क्या बदलाव लाता है।
