ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव के बीच चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ बीजिंग में अहम बैठक की है। $109 प्रति बैरल के करीब पहुंच चुके ब्रेंट क्रूड के बीच चीन अब 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम' के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की कोशिश कर रहा है।
चीन ने बीजिंग में ईरान के साथ उच्च स्तरीय वार्ता के जरिए मध्य-पूर्व में जारी तनाव को कम करने का प्रयास तेज कर दिया है। मुख्य फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य पर है, जो दुनिया के लिए एनर्जी सप्लाई का सबसे बड़ा समुद्री मार्ग है। इस रास्ते में बार-बार आने वाली बाधाओं के कारण इंटरनेशनल फ्यूल मार्केट में अस्थिरता बनी हुई है।
भारत पर क्या होगा असर?
ब्रेंट क्रूड के $109 प्रति बैरल के आसपास बने रहने से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए होर्मुज में तनाव का मतलब है सीधा असर हमारे इंपोर्ट बिल पर। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से रुपया पर दबाव बढ़ता है और घरेलू स्तर पर फ्यूल इन्फ्लेशन की आशंका पैदा होती है। लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टरों पर सबसे ज्यादा मार्जिन का दबाव देखने को मिल सकता है।
अगली बड़ी हलचल
यह कूटनीतिक पहल 24 सितंबर को वॉशिंगटन में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात से ठीक पहले हुई है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट पहले ही संकेत दे चुके हैं कि इस बैठक में ईरान और बीजिंग के वित्तीय संबंधों पर चर्चा होगी। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह डिप्लोमेटिक कोशिश होर्मुज को फिर से खोलने में सफल होती है, क्योंकि इसी से कच्चे तेल में मौजूद 'जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम' कम हो पाएगा।
