चीन ने लाओस के Ban Keun एयरपोर्ट पर अपने पहले विदेशी एयर फोर्स ट्रेनिंग सेंटर का उद्घाटन किया है। जिबूती और कंबोडिया के बाद यह बीजिंग का तीसरा अंतरराष्ट्रीय मिलिट्री आउटपोस्ट है, जो इंडोचाइना क्षेत्र में सुरक्षा समीकरणों को बदल सकता है।
चीन ने वियनतियाने से 45 किलोमीटर उत्तर में Ban Keun एयरपोर्ट पर अपना पहला विदेशी एयर फोर्स ट्रेनिंग सेंटर स्थापित कर लिया है। इस कदम से People’s Liberation Army की सीमाओं के बाहर सैन्य मौजूदगी का विस्तार हुआ है। इस नए China-Laos Joint Support and Training Centre का मुख्य उद्देश्य पायलटों को एडवांस ट्रेनिंग देना है।
रणनीतिक महत्व
यह स्थान ऐतिहासिक रूप से वियतनाम युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। गौरतलब है कि चीन के पहले के विदेशी आउटपोस्ट जिबूती और कंबोडिया मुख्य रूप से नौसैनिक और लॉजिस्टिक्स क्षमताओं पर केंद्रित थे, जबकि यह पहली ऐसी साइट है जो विशेष रूप से एयर फोर्स ऑपरेशंस के लिए तैयार की गई है। यह विस्तार चीन की उस रणनीति का हिस्सा है, जहां आर्थिक निवेश के साथ-साथ अब मजबूत सैन्य उपस्थिति भी दर्ज की जा रही है।
सुरक्षा और व्यापार पर असर
चीन और लाओस के बीच बढ़ती यह सुरक्षा साझेदारी, 2021 में पूरी हुई China-Laos Railway जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के बाद और भी मजबूत हुई है। यह बेस महत्वपूर्ण समुद्री और जमीनी ट्रेड रूट्स के काफी करीब है, जो South China Sea की सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील है।
निवेशकों के लिए यह विकासक्रम दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजार में एक नए रिस्क फैक्टर की तरह है। आने वाले समय में पड़ोसी देशों के डिफेंस स्पेंडिंग और क्षेत्रीय कूटनीति में बदलाव आने की संभावना है, जिसका सीधा असर ग्लोबल कॉमर्स और सप्लाई चेन ऑपरेशंस पर पड़ सकता है।
