चीन ने नया स्टेट काउंसिल ऑर्डर नंबर **841** लागू कर दिया है, जिसके तहत तकनीकी सुरक्षा उल्लंघन के संदेह में नागरिकों के देश छोड़ने पर रोक लगाई जा सकती है। यह नया नियम टेक कंपनियों और विदेशी कारोबारियों के लिए बड़ी अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
चीन की सरकार ने 15 सितंबर, 2026 से नए एग्जिट-एंट्री रेगुलेशन, जिन्हें 'स्टेट काउंसिल ऑर्डर नंबर 841' कहा जा रहा है, को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। यह नीति आव्रजन और सुरक्षा एजेंसियों को व्यक्तियों की आवाजाही पर अधिक नियंत्रण प्रदान करती है, विशेष रूप से उन लोगों पर जो राष्ट्रीय तकनीकी सुरक्षा के लिए खतरा माने जाते हैं।
नए नियमों की बारीकियां
नए कानूनी ढांचे के तहत, यदि किसी नागरिक पर निर्यात नियंत्रण या तकनीकी आयात-निर्यात कानूनों के उल्लंघन का संदेह है, तो अधिकारी उन पर 6 महीने से लेकर 3 साल तक का एग्जिट बैन लगा सकते हैं। इतना ही नहीं, विदेशियों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। यदि वीज़ा आवेदन में गलत जानकारी पाई जाती है, तो अधिकारियों के पास उन्हें 1 से 5 साल तक देश में प्रवेश से प्रतिबंधित करने का अधिकार है। इसके अलावा, इमिग्रेशन अधिकारियों को यात्रा के उद्देश्य की जांच के लिए इलेक्ट्रॉनिक डेटा तक पहुंच भी दी गई है।
ग्लोबल कंपनियों के लिए रिस्क
मल्टीनेशनल फर्मों के लिए यह कानून बड़े ऑपरेशनल जोखिम लेकर आया है। कई कंपनियां अपने तकनीकी प्रोजेक्ट्स को मैनेज करने और ग्लोबल टीमों को जोड़ने के लिए स्टाफ को सीमाओं के पार भेजने पर निर्भर रहती हैं। यदि इन सख्त नियमों के कारण मुख्य पेशेवरों (key personnel) की आवाजाही प्रभावित होती है, तो प्रोजेक्ट में देरी और स्टाफिंग से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
अभी यह साफ नहीं है कि स्थानीय स्तर पर इन नियमों को कितनी सख्ती से लागू किया जाएगा, जिसके कारण बिजनेस ग्रुप्स में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल, ताइवान की फर्मों सहित कई वैश्विक कंपनियां इस स्थिति पर पैनी नजर रख रही हैं कि यह नीति प्रोफेशनल्स की गतिशीलता (professional mobility) को किस हद तक सीमित करती है।
