CJI Surya Kant: ग्लोबल ग्रीन पॉलिसी पर CJI का बड़ा सवाल, विकासशील देशों पर बोझ को लेकर चेताया

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
CJI Surya Kant: ग्लोबल ग्रीन पॉलिसी पर CJI का बड़ा सवाल, विकासशील देशों पर बोझ को लेकर चेताया

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने अंतरराष्ट्रीय क्लाइमेट नीतियों पर कड़ा रुख अपनाया है। लंदन में आयोजित कॉमनवेल्थ डायलॉग में उन्होंने कहा कि ग्रीन ट्रांजिशन का बोझ विकासशील देशों पर अनुचित तरीके से डाला जा रहा है।

क्लाइमेट नीतियों में भेदभाव का मुद्दा

लंदन में आयोजित 'हाई-लेवल कॉमनवेल्थ पॉलिसी डायलॉग' के दौरान CJI सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि अमीर देशों ने सदियों तक कोयले और तेल के जरिए अपनी समृद्धि हासिल की, लेकिन अब वे विकासशील देशों पर तेजी से डिकार्बोनाइजेशन (decarbonization) का दबाव डाल रहे हैं। यह दृष्टिकोण भारतीय निवेशकों के लिए एक बड़ा संकेत है, क्योंकि आने वाले समय में कंपनियां अब केवल प्रॉफिट नहीं, बल्कि क्लाइमेट कंप्लायंस के दायरे में भी परखी जाएंगी।

सप्लाई चेन और कमोडिटी पर संकट

CJI ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए जरूरी कच्चे माल जैसे लिथियम (Lithium), कोबाल्ट (Cobalt) और कॉपर (Copper) की माइनिंग को लेकर भी चिंता जताई है। उनका मानना है कि ग्रीन टेक्नोलॉजी को अपनाने के चक्कर में उन क्षेत्रों में नए तरह का शोषण नहीं होना चाहिए जहां से ये खनिज निकाले जाते हैं।

निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

न्यायपालिका अब वैज्ञानिक डेटा और उत्सर्जन मेट्रिक्स (emission metrics) पर बारीकी से नजर रख रही है। इसका मतलब यह है कि:

  • सख्त नियम: माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सप्लाई चेन एथिक्स की जांच और कड़ी होगी।
  • प्रोजेक्ट लागत: रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए अब कानूनी और नियामक अनुपालन (compliance) का खर्च बढ़ सकता है।
  • जुडिशियरी की भूमिका: भविष्य में कोर्ट्स ग्रीन प्रोजेक्ट्स की लंबी अवधि की व्यवहार्यता (feasibility) तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं, जिससे रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के रिस्क प्रोफाइल में बदलाव आ सकता है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.