वैश्विक तेल बाज़ारों में शुक्रवार को बड़ी हलचल देखने को मिली। इराक में हुए धमाकों और ईरान पर अमेरिकी हमलों की खबरों के बीच ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव **6%** से ज़्यादा उछलकर **$100** प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
Detailed Coverage
तेल के भाव में तूफानी तेज़ी
शुक्रवार को ग्लोबल ऑयल मार्केट्स मेंBrent Crude फ्यूचर्स में 6% से ज़्यादा की तेज़ी आई और यह $100 प्रति बैरल के पार चला गया। यह उछाल इराक में एक सैन्य ठिकाने के पास धमाकों की खबरों और ईरान के कई इलाकों में अमेरिकी हमलों के साथ-साथ हुआ। इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव, जो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम है, अब और गहरा गया है।
तेल सप्लाई पर मंडराया खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया की लगभग 1/5th यानी 20% तेल और गैस सप्लाई का रास्ता है, इन तनावों के केंद्र में है। इस मार्ग में किसी भी बड़ी रुकावट से वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में सप्लाई की कमी हो सकती है। इसके अलावा, यमन के हौथी विद्रोहियों (Houthi rebels) द्वारा लाल सागर (Red Sea) में सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाने की भी खबरें हैं। यह होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) - दोनों महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों के लिए एक दोहरा खतरा पैदा करता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारतीय निवेशकों के लिए यह स्थिति काफी मायने रखती है। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक (importer) है। ऐसे में, वैश्विक कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश के इंपोर्ट बिल पर असर पड़ता है। साथ ही, अगर तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इस बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक नहीं पहुंचा पाती हैं, तो उनके मुनाफे पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा, एविएशन, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टरों के लिए भी ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकती है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है।
क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक कोशिशें
अमेरिकी सेना पिछले 13 दिनों से लगातार ईरान पर हमले कर रही है, जिसका मकसद ईरान की समुद्री वाणिज्य को खतरा पहुंचाने की क्षमता को कम करना बताया जा रहा है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई प्रांतों में हताहत हुए हैं, जिनमें इस्फहान (Isfahan) और खुज़ेस्तान (Khuzestan) में नौसैनिक संपत्ति (naval assets) और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। इराक ने भी इस बात पर चिंता जताई है कि उसके क्षेत्र का इस्तेमाल संघर्ष के लिए हो रहा है और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।
बाजार पर नज़र रखने वाले निवेशकों को आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि लगातार ऊंची कीमतें घरेलू महंगाई (inflation) और ब्याज दर की नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं। वैश्विक ऊर्जा एजेंसियों से सप्लाई की निरंतरता पर किसी भी नए बयान और भारतीय सरकार की ओर से फ्यूल प्राइसिंग या इन्वेंटरी मैनेजमेंट पर किसी घोषणा पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, बाज़ार प्रतिभागी तेल फ्यूचर्स को स्थिर करने के लिए तनाव कम होने के संकेतों पर भी नज़र रखेंगे।
