रेड सी (Red Sea) में हूती विद्रोहियों द्वारा रणनीतिक द्वीपों पर कब्जे के बाद कच्चा तेल **3%** उछलकर **$108** प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। सप्लाई चेन में बाधा की आशंका से ग्लोबल मार्केट में डर का माहौल है और भारत जैसे इंपोर्ट पर निर्भर देशों के लिए यह महंगाई की नई चुनौती बन सकता है।
बाजार में मची खलबली
सोमवार, 14 सितंबर 2026 को ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स 3% से अधिक की तेजी के साथ $108.04 प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। इस उछाल की बड़ी वजह हूती विद्रोहियों द्वारा दक्षिणी रेड सी में 'ग्रेटर' और 'लेसर हनिश' द्वीपों पर कब्जा करना है। ये द्वीप वैश्विक तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री कॉरिडोर हैं, जिस पर कब्जे से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन पर बड़ा दबाव आ गया है।
भारत के लिए क्या हैं खतरे?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर सरकारी इंपोर्ट बिल पर पड़ेगा, जो 'करेंट अकाउंट बैलेंस' और भारतीय रुपया (Indian Rupee) पर नकारात्मक दबाव बना सकता है।
कॉर्पोरेट जगत पर मार
क्रूड की बढ़ती कीमतें ट्रांसपोर्टेशन, एविएशन और केमिकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए परेशानी का सबब हैं। इन कंपनियों के लिए 'इनपुट कॉस्ट' बढ़ जाएगी। ऐसे में मुनाफा बचाने की चुनौती होगी क्योंकि क्या कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डाल पाएंगी या मार्जिन के साथ समझौता करना पड़ेगा, यह बड़ा सवाल है। इसके अलावा, ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में बढ़ती यील्ड और महंगाई की आशंका के बीच, निवेशकों की नजरें अब ह्यूस्टन में चल रही G20 एनर्जी मिनिस्टीरियल मीटिंग पर हैं, जहां पावर मिनिस्टर मनोहर लाल वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर चर्चा कर रहे हैं।
