ईरान और सऊदी अरब में हुए धमाकों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है। Brent Crude **$100** प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर खतरा मंडरा रहा है और भारत जैसे आयात करने वाले देशों के लिए महंगाई का डर बढ़ गया है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर चोट
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों का $100 के स्तर को छूना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सरदर्द बन गया है। कच्चे तेल के महंगे होने से हमारा इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, ट्रेड डेफिसिट पर दबाव आएगा और देश में महंगाई का खतरा बढ़ जाएगा। एविएशन, सीमेंट, केमिकल और पेंट जैसे सेक्टर्स के लिए यह खबर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर डाल सकती है क्योंकि इनका इनपुट कॉस्ट बढ़ जाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट
तनाव की लोकेशन काफी चिंताजनक है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल की सप्लाई का सबसे बड़ा रास्ता है। अगर यहां कोई भी बाधा आती है, तो ग्लोबल ऑयल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, तनाव के चलते शिपिंग इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे केवल तेल ही नहीं, बल्कि अन्य आयातित सामान की लागत में भी बढ़ोतरी होगी।
स्टैगफ्लेशन का खतरा और निवेशकों के लिए संकेत
मौजूदा हालात स्टैगफ्लेशन (Stagflation) के डर को फिर से जीवित कर रहे हैं, जहां धीमी इकोनॉमिक ग्रोथ के साथ महंगाई तेजी से बढ़ती है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे ऑयल प्राइस ट्रेंड पर नजर रखें। कंपनियों के लिए चुनौती यह होगी कि वे बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर कितना डाल पाती हैं, जो आने वाले समय में उनके मार्जिन को तय करेगा। इस अस्थिर माहौल में मार्केट में उतार-चढ़ाव (Volatility) बने रहने की पूरी संभावना है।
