ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव का पहला चरण बेहद करीबी रहा है, जिसके बाद अब Flávio Bolsonaro और मौजूदा राष्ट्रपति Lula da Silva के बीच 25 अक्टूबर को रनऑफ चुनाव होगा। इस राजनीतिक अनिश्चितता का असर ग्लोबल कमोडिटी बाजार और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
चुनावी घमासान और तनाव
ब्राजील में 4 अक्टूबर को हुए पहले चरण के मतदान के बाद से ही राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है। रियो डी जनेरियो की सड़कों पर हजारों छात्रों का विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि देश गहरे राजनीतिक ध्रुवीकरण की चपेट में है। आंकड़ों की बात करें तो फार-राइट उम्मीदवार Flávio Bolsonaro ने 47% वोट हासिल किए, जबकि मौजूदा राष्ट्रपति Luiz Inácio Lula da Silva 45% के साथ बहुत पीछे नहीं हैं।
ग्लोबल मार्केट के लिए क्यों है जरूरी?
इन्वेस्टर्स इस चुनाव पर बारीकी से नजर रख रहे हैं क्योंकि ब्राजील आयरन ओर, सोयाबीन और चीनी जैसी कमोडिटीज का दुनिया का प्रमुख निर्यातक है। यहां की घरेलू और विदेश नीति में कोई भी बड़ा बदलाव ग्लोबल सप्लाई चेन और कमोडिटी की कीमतों को सीधे प्रभावित कर सकता है, जिसका असर भारत जैसे देशों के मेटल्स, माइनिंग और एग्री सेक्टर पर भी पड़ सकता है।
भ्रष्टाचार के आरोप और अनिश्चितता
चुनावी माहौल में 'Banco Master' से जुड़े पुराने भ्रष्टाचार के मामलों ने भी आग में घी का काम किया है, जिसे प्रदर्शनकारी अपने विरोध का आधार बना रहे हैं। फिलहाल दोनों उम्मीदवार छोटी पार्टियों के वोट बैंक को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटे हैं।
इन्वेस्टर्स के लिए आगे की राह
25 अक्टूबर को होने वाले फाइनल वोटिंग से पहले मार्केट की नजरें नई सरकार की ट्रेड पॉलिसी और फिस्कल स्पेंडिंग पर टिकी होंगी। यदि नई सरकार अपनी नीतियों में कड़े बदलाव करती है, तो ब्राजीलियाई मुद्रा (Brazilian Real) में उतार-चढ़ाव आना तय है। किसी भी तरह का लंबा राजनीतिक गतिरोध ग्लोबल मार्केट में शॉर्ट-टर्म अस्थिरता पैदा कर सकता है।
