ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा अब 25 अक्टूबर को होने वाले रनऑफ (Runoff) से तय होगा। Flávio Bolsonaro और Luiz Inácio Lula da Silva के बीच मुकाबला काफी कड़ा है, जिससे लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर राजनीतिक अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
चुनाव का गणित और आगे की राह
रविवार को हुए पहले चरण के मतदान में Flávio Bolsonaro ने लगभग 47% वोट हासिल किए, जबकि मौजूदा राष्ट्रपति Luiz Inácio Lula da Silva को 45% वोट मिले। जीत के लिए जरूरी 50% का जादुई आंकड़ा न छू पाने के कारण अब देश में अगले 3 हफ्ते तक जोरदार चुनाव प्रचार चलेगा, जो मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव ला सकता है।
इस चुनाव में Liberal Party ने सीनेट और चैंबर ऑफ डेप्युटीज में अपनी सीटें बढ़ाई हैं। यह नतीजे राजनीतिक समीकरण बदलने का संकेत हैं, जिससे सरकार के लिए नए कानून और पॉलिसी पास कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्यों है चिंता?
ब्राजील की इकोनॉमी पहले से ही कई दबावों से जूझ रही है। देश पर सार्वजनिक कर्ज (Public Debt) GDP के 82% के पार जा चुका है और इकोनॉमिक ग्रोथ महज 2% रहने का अनुमान है। महंगाई और जन सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच गहरी मतभेद हैं, जो निवेशकों के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं।
चूंकि ब्राजील आयरन ओर (Iron Ore), सोया और तेल का बड़ा उत्पादक है, इसलिए वहां की राजनीतिक अस्थिरता का असर ग्लोबल कमोडिटी मार्केट पर भी पड़ सकता है। निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाली सरकार फिस्कल डिसिप्लिन (Fiscal Discipline) बनाए रखती है या सोशल स्पेंडिंग पर जोर देती है।
अगले 3 हफ्ते में बाजार इस बात पर नजर रखेगा कि कौन सा उम्मीदवार टैक्स पॉलिसी और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर क्या रुख अपनाता है। पॉलिटिकल पोलराइजेशन के कारण करेंसी में उतार-चढ़ाव की पूरी संभावना है, इसलिए इमर्जिंग मार्केट के इन्वेस्टर्स अभी 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं।
