बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने अमेरिका से प्रतिबंध हटाने और Citibank में फ्रीज पड़े करीब **$44 मिलियन** जारी करने की मांग की है। यह मामला जेल से कैदियों की रिहाई और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच एक जटिल मोड़ बन गया है।
बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको इस समय अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए अपनी आर्थिक घेराबंदी को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बातचीत का मुख्य केंद्र Citibank में फ्रीज पड़े $43 मिलियन से $44 मिलियन के सरकारी एसेट्स हैं। यह मांग हाल ही में हुई कैदियों की रिहाई के बदले में एक बड़े कूटनीतिक समझौते का हिस्सा मानी जा रही है।\n\nहाल ही में मिन्स्क में अमेरिकी विशेष दूत जॉन कोल के साथ हुई चर्चा में, बेलारूसी पक्ष ने इन फंड्स को अनफ्रीज करने को अगली बातचीत के लिए एक अनिवार्य शर्त बताया है। अमेरिकी प्रशासन फिलहाल इस मामले में बैंक के साथ मिलकर यह मूल्यांकन कर रहा है कि क्या इन फंड्स को जारी करना कानूनी रूप से संभव है, हालांकि यह प्रक्रिया पूरी तरह से सैंक्शन्स रिलीफ (Sanctions Relief) के कूटनीतिक ढांचे से जुड़ी हुई है।\n\n### बैंकिंग और रेगुलेटरी चुनौतियां\nCitibank जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के लिए यह स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। बैंकों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कड़े नियमों का पालन करना होता है, जो अक्सर भू-राजनीतिक बदलावों के बीच फंस जाते हैं। किसी भी एसेट को अनफ्रीज करने के लिए अमेरिकी कानूनों और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना अनिवार्य है, जिससे यह प्रक्रिया और भी पेचीदा हो गई है।\n\n### 'कैदी कूटनीति' (Prisoner Diplomacy) पर विवाद\nयह आर्थिक राहत की मांग उस समय सामने आई है जब अमेरिका की मध्यस्थता से कुछ सौ राजनीतिक कैदियों को रिहा किया गया है। हालांकि बेलारूस सरकार इसे 'गुडविल जेस्चर' बता रही है, लेकिन 'वियासना' (Viasna) जैसे मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बेलारूस में अभी भी 900 से अधिक राजनीतिक कैदी बंद हैं। आलोचकों का मानना है कि सत्ता पक्ष इन कैदियों को आर्थिक और राजनीतिक रियायतें हासिल करने के लिए मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहा है।\n\nआने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह बातचीत स्थायी नीतिगत बदलाव की ओर ले जाती है या केवल कैदियों के बदले आर्थिक मदद का एक सिलसिला बनकर रह जाती है। निवेशकों और वैश्विक पर्यवेक्षकों की नजरें अब Citibank के एसेट्स की स्थिति और अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों पर लिए जाने वाले अगले फैसले पर टिकी हैं।
