पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) के बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को PoK का नया प्रधानमंत्री चुना गया है। गिलानी ने विधानसभा में **30** वोट हासिल किए, हालांकि उनके चुनाव को लेकर धांधली के गंभीर आरोप और भारी राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
मुजफ्फराबाद में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी ने 44 में से 30 वोट पाकर जीत हासिल की। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के मुख्तार अहमद को हराया, जिन्हें केवल 14 वोट ही मिले।
अंदरूनी कलह और विरोध
इस चुनाव में पार्टी के भीतर की दरारें भी खुलकर सामने आईं। PML-N के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर ने नेतृत्व के साथ मतभेदों के चलते वोटिंग का बहिष्कार किया। गिलानी की जीत पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हार गए थे और बाद में टेक्नोक्रेट्स के लिए आरक्षित सीट से विधानसभा में पहुंचे।
अस्थिरता और कानून-व्यवस्था
PoK में पिछले कई महीनों से जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी के नेतृत्व में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। जून से जारी इन विरोध प्रदर्शनों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है। हालांकि सरकार ने इस कमिटी को 'आउटलॉ' (प्रतिबंधित) घोषित कर दिया है, लेकिन गवर्नेंस और रिफ्यूजी सीटों को लेकर जनता का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
ठप पड़े चुनाव
विधानसभा की कुल 53 सीटों के मुकाबले अभी केवल 46 सदस्य ही सदन का हिस्सा हैं। पूंछ और सुधनोती जिलों की 7 सीटों पर कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण चुनाव अब भी लंबित हैं। अब चुनौती यह है कि क्या गिलानी प्रशासन इन प्रदर्शनों को शांत कर पाएगा और लंबित चुनाव कराने में सफल होगा या क्षेत्रीय अशांति और बढ़ेगी।
