फरवरी 2026 के चुनावों में जीत के बाद Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने Awami League पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस राजनीतिक उठापटक और आंतरिक कलह के बीच देश में महंगाई और गरीबी का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
12 फरवरी, 2026 को हुए आम चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (BNP) को दो-तिहाई बहुमत मिलने के बाद से ही देश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल चुका है। सत्ता संभालते ही सरकार ने Awami League पर बैन लगा दिया है, जिससे विपक्ष पूरी तरह हाशिए पर चला गया है। इस दौरान बड़े पैमाने पर विपक्ष के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई है, जिस पर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है।
गठबंधन में दरार और गवर्नेंस की चुनौती
सत्ता के केंद्रीकरण के साथ ही सरकार के भीतर भी मुश्किलें बढ़ रही हैं। खबर है कि ruling BNP और Jamaat-e-Islami के बीच संवैधानिक सुधारों और पावर-शेयरिंग को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। गठबंधन की यह आपसी कलह सरकार की वित्तीय और ढांचागत सुधार लागू करने की क्षमता पर सवाल उठा रही है। सरकार का कहना है कि वे समाधान के लिए तैयार हैं, लेकिन यह Awami League द्वारा पुरानी गलतियों को स्वीकार करने की कड़ी शर्त पर टिका है।
आर्थिक मंदी और गरीबी का जोखिम
यह राजनीतिक अस्थिरता ऐसे समय में आई है जब देश गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में इकोनॉमिक ग्रोथ में भारी सुस्ती देखी गई है। स्थिति यह है कि देश में महंगाई बेकाबू हो रही है और राष्ट्रीय गरीबी दर 22.5% तक पहुंचने का अनुमान है। निवेशकों और क्षेत्रीय जानकारों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि आर्थिक बदहाली सीधे तौर पर सोशल अनस्टेबिलिटी को जन्म देती है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
इस पूरे घटनाक्रम का असर पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आर्थिक स्थिति और नहीं सुधरी, तो देश में नागरिक अशांति फैलने का बड़ा खतरा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मौजूदा सरकार गिरते हुए आर्थिक आंकड़ों को संभाल पाएगी या गठबंधन की आंतरिक लड़ाई देश को और पीछे धकेलेगी।
