काठमांडू के मेयर Balen Shah ने UN जनरल असेंबली में नेपाल, भारत और चीन के बीच 'हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म' का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य मकसद सैटेलाइट डेटा और अर्ली-वार्निंग सिस्टम साझा करके हिमालयी क्षेत्र में आपदा जोखिमों को कम करना है।
काठमांडू के मेयर Balen Shah ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की महासभा को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया है। इस 'हिमालयन क्लाइमेट रेजिलिएंस मैकेनिज्म' का उद्देश्य भारत और चीन के साथ मिलकर एक ऐसा ढांचा तैयार करना है, जो सैटेलाइट डेटा और साझा अर्ली-वार्निंग सिस्टम के जरिए जलवायु आपदाओं पर लगाम लगा सके।\n\n### आर्थिक स्थिरता के लिए क्यों है जरूरी?\n\nहिमालयी क्षेत्र में काम करने वाले निवेशकों और कंपनियों के लिए जलवायु अस्थिरता एक बड़ा रिस्क है। भारी बारिश, बाढ़ और ग्लेशियरों के खिसकने से हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को खतरा बना रहता है। अगर तीनों देश एक साझा फ्रेमवर्क पर काम करते हैं, तो इन प्रोजेक्ट्स की लॉन्ग-टर्म सुरक्षा और निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ सकता है।\n\n### क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में कदम\n\nनेपाल-तिब्बत सीमा पर हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद यह प्रस्ताव और भी महत्वपूर्ण हो गया है। उस समय भारत और चीन, दोनों ने राहत सामग्री भेजी थी, जो इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह प्रस्ताव राजनीतिक तनाव को कम कर व्यावहारिक सहयोग (Practical Cooperation) की दिशा में एक कोशिश है, जो भविष्य के द्विपक्षीय प्रोजेक्ट्स के लिए स्थिरता का काम कर सकता है।\n\n### निवेशकों की आगे की रणनीति\n\nअब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या भारत और चीन इस साझा ढांचे को स्वीकार करते हैं। अगर यह प्रस्ताव एक कंक्रीट ऑपरेशनल फ्रेमवर्क में बदल जाता है, तो यह हिमालय क्षेत्र में बिजनेस और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए सेफ्टी प्रोटोकॉल्स को स्टैंडर्डाइज करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
