BRICS Summit in Delhi: शशि थरूर की चेतावनी, 'Anti-West' रुख से बचकर चले भारत

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AuthorAditya Rao|Published at:
BRICS Summit in Delhi: शशि थरूर की चेतावनी, 'Anti-West' रुख से बचकर चले भारत

नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को होने जा रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह समूह एक 'गैर-पश्चिमी' मंच बना रहे, न कि 'पश्चिमी-विरोधी' बन जाए। निवेशकों के लिए यह कूटनीतिक रुख बेहद अहम है क्योंकि भारत को अपने बढ़ते व्यापार घाटे और पश्चिमी बाजारों तक पहुंच के बीच संतुलन बनाना है।

12 सितंबर 2026 से नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए वैश्विक नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है। इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने समूह की दिशा को लेकर अहम टिप्पणी की है। उनका तर्क है कि भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए यह जरूरी है कि BRICS को एक ऐसी शक्ति के रूप में देखा जाए जो पश्चिम का विकल्प तो हो, लेकिन उसकी दुश्मन नहीं।

निवेशकों के लिए क्यों है यह चिंता का विषय?

इन्वेस्टर्स के नजरिए से व्यापारिक आंकड़े काफी महत्वपूर्ण हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 में BRICS देशों के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) बढ़कर $226.1 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया है। इसका मतलब साफ है कि भारत इन देशों से जितना एक्सपोर्ट कर रहा है, उससे कहीं ज्यादा आयात (Import) कर रहा है। आने वाले शिखर सम्मेलन में भारत के सामने इस असंतुलन को ठीक करने की बड़ी चुनौती होगी।

भू-राजनीति और मार्केट पर असर

भारत की टेक्नोलॉजी, कैपिटल और एक्सपोर्ट के लिए पश्चिमी देशों पर निर्भरता जगजाहिर है। यदि BRICS का रुख आधिकारिक तौर पर 'Anti-Western' होता है, तो भारत के वैश्विक व्यापारिक संबंधों में जटिलता आ सकती है। इसके अलावा, यदि समूह पश्चिमी-प्रधान भुगतान प्रणालियों (Payment Systems) को दरकिनार करने के लिए कोई विकल्प बनाता है, तो इससे सेकेंडरी सैंक्शंस (Secondary Sanctions) का खतरा बढ़ सकता है, जो सीधे तौर पर भारतीय वित्तीय संस्थानों के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है।

अब बाजार की नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठकों पर टिकी हैं। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये देश किसी साझा आर्थिक ढांचे पर सहमति बना पाते हैं या फिर आंतरिक मतभेद इस सम्मेलन पर भारी पड़ेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.