नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच अहम मुलाकात हुई। इस बातचीत से दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती दिख रही है, जिससे निवेशकों को भविष्य में नियामक बाधाएं कम होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को आयोजित 18वें BRICS समिट के दौरान एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक हुई। सात साल में यह चीनी राष्ट्रपति की पहली भारत यात्रा थी, जिसे 2020 के सीमा विवाद के बाद रिश्तों के 'रीसेट' (Reset) के रूप में देखा जा रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इस मुलाकात का सबसे अहम पहलू आर्थिक मोर्चे पर है। 2020 से ही भारत और चीन के बीच कारोबारी संबंधों में काफी सख्ती रही है। चीनी पूंजी प्रवाह (FDI) पर कड़े नियमों से लेकर बिजनेस वीजा और सीधी उड़ानों (Direct Flights) के निलंबन तक, कारोबार पर काफी असर पड़ा है। इस 'कॉशस था (Cautious Thaw)' से अब उम्मीद जगी है कि इन क्षेत्रों में सामान्य स्थिति धीरे-धीरे बहाल हो सकती है।
'न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन' का संकेत
समिट में अपनाए गए 'न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन' में सप्लाई चेन और ट्रेड असंतुलन को दुरुस्त करने पर जोर दिया गया है। यह स्पष्ट करता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, दोनों देश आर्थिक स्थिरता की अहमियत समझते हैं।
जोखिम अभी भी बरकरार
निवेशकों को बहुत ज्यादा उत्साहित होने से पहले थोड़ा संतुलित नज़रिया रखने की जरूरत है। फिलहाल यह कदम 'प्रैग्मैटिक रिस्क मैनेजमेंट' (Pragmatic Risk Management) जैसा है, न कि कोई पूर्ण रणनीतिक बदलाव। भारत सरकार अभी भी पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश पर कड़ी नियामक निगरानी (Regulatory Scrutiny) रख रही है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होनी चाहिए कि क्या सीधी उड़ानें शुरू होती हैं और वीजा नियमों में ढील दी जाती है या नहीं।
