नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने AI और ट्रेड समेत पांच क्षेत्रों में सहयोग का प्रस्ताव रखा है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिटिकल सप्लाई चेन के 'वेपनाइजेशन' के खतरों पर बड़ा अलर्ट जारी किया है।
नई दिल्ली में संपन्न हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में दो अलग-अलग रणनीतिक दृष्टिकोण देखने को मिले। एक तरफ जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल इकोनॉमी, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और टेक्निकल टैलेंट जैसे क्षेत्रों में गहरे सहयोग का प्रस्ताव पेश किया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक सप्लाई चेन की स्थिरता को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की।
मैन्युफैक्चरिंग और निवेश पर असर
पीएम मोदी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स का इस्तेमाल 'हथियार' के तौर पर किया जा सकता है। यह चिंता भारतीय मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए बेहद अहम है। उन भारतीय कंपनियों के लिए यह बड़ा रिस्क है जो क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए विदेशी कच्चे माल और रेयर-अर्थ एलिमेंट्स (Rare-earth elements) पर निर्भर हैं।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
सप्लाई चेन में अत्यधिक निर्भरता से कीमतों में अस्थिरता, रेगुलेटरी अड़चनें और ट्रेड प्रतिबंधों का खतरा बना रहता है। भारत अब खुद को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर स्थापित करना चाहता है, ऐसे में वैकल्पिक और विश्वसनीय सोर्स तलाशना सरकार की प्राथमिकता है। अब बाजार की नजरें इस पर टिकी हैं कि ब्रिक्स के ये प्रस्ताव भारत की आत्मनिर्भरता और घरेलू औद्योगिक लक्ष्यों के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं। साल 2027 में चीन के पास ब्रिक्स की प्रेसिडेंसी होगी, जो इन डिजिटल मानकों के कार्यान्वयन के लिए अगला बड़ा चेकपॉइंट साबित होगा।
