Baloch Liberation Army (BLA) ने अपने कमांडर-इन-चीफ बशीर ज़ेब को पद से हटा दिया है। अब पूरी कमान सीनियर कमांड काउंसिल के हाथों में सौंप दी गई है। यह बड़ा फैसला हालिया सैन्य अभियानों में मिली असफलता और आंतरिक कलह के बाद लिया गया है।
नेतृत्व में बड़ा बदलाव
3 नवंबर, 2026 को Baloch Liberation Army (BLA) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि बशीर ज़ेब बलोच अब संगठन के कमांडर-इन-चीफ नहीं रहे। संगठन के प्रवक्ता जीयंद बलोच ने पुष्टि की है कि सभी सैन्य और प्रशासनिक शक्तियाँ अब 'सीनियर कमांड काउंसिल' को दे दी गई हैं। आधिकारिक तौर पर इसे 'संवैधानिक प्रक्रिया' बताया जा रहा है ताकि नेतृत्व को आजीवन एक व्यक्ति के हाथ में न रखा जाए, लेकिन इसके पीछे की कहानी कुछ और ही है।
क्यों हुआ यह बदलाव?
संगठन के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अचानक नहीं हुआ है। साल 2026 में चलाए गए 'ऑपरेशन हेरोफ-2' की भारी विफलता और उसमें संगठन को हुए भारी नुकसान ने बशीर ज़ेब के खिलाफ असंतोष को हवा दी। इस अभियान में मारे गए अपने लड़ाकों की संख्या और खराब रणनीति को लेकर संगठन के भीतर कमांडरों के बीच काफी खींचतान चल रही थी।
सुरक्षा पर क्या पड़ेगा असर?
बलूचिस्तान में विदेशी निवेश से जुड़ी परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के लिए जानी जाने वाली इस संस्था के लिए यह एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। सुरक्षा विशेषज्ञ इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या नई 'सीनियर कमांड काउंसिल' अपनी रणनीति में कोई बड़ा बदलाव लाएगी, या संगठन के अंदर बिखराव और गहरा जाएगा। अभी यह साफ नहीं है कि नेतृत्व में आए इस बदलाव का क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा, लेकिन आने वाले दिनों में संगठन की नई रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
