अजरबैजान में स्कूलों के नए ड्रेस कोड और सेक्युलर नियमों के कारण देश भर में छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इस विवाद के चलते अब तक **37** लोगों को हिरासत में लिया गया है और तुर्की के साथ कूटनीतिक तनाव भी बढ़ गया है।
अजरबैजान में स्कूलों के लिए लागू किए गए नए ड्रेस कोड ने पूरे देश में सामाजिक और कूटनीतिक हलचल मचा दी है। 21 सितंबर, 2026 को कैबिनेट ऑफ मिनिस्टर्स द्वारा अपनाए गए नियमों के तहत स्कूलों में सेक्युलरिज्म को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसे स्थानीय प्रशासन हिजाब पर प्रतिबंध के रूप में लागू कर रहा है। 6 अक्टूबर को जारी एक और सर्कुलर के जरिए ये नियम शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य कर दिए गए हैं।
संवैधानिक संकट और विरोध
सरकार का तर्क है कि ये कदम संविधान के आर्टिकल 18 के तहत धर्म और राज्य को अलग रखने के लिए जरूरी हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी इसे आर्टिकल 48 यानी धार्मिक स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन मान रहे हैं। कई स्कूलों में हिजाब पहनने वाली छात्राओं और शिक्षिकाओं को एंट्री देने से मना किया गया है, जिससे छात्रों ने क्लास का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है।
गिरफ्तारियां और तनाव
गृह मंत्रालय के अनुसार, 12 अक्टूबर, 2026 तक विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कम से कम 37 लोगों को हिरासत में लिया गया है। सरकार की सख्ती के बावजूद देश के कई शहरी केंद्रों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है।
तुर्की के साथ कूटनीतिक दरार
इस मामले ने अजरबैजान और तुर्की के बीच के ऐतिहासिक संबंधों पर भी असर डाला है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के एक सलाहकार ने हिजाब वाली छात्राओं पर प्रतिबंध को 'अस्वीकार्य' बताया है। इसके जवाब में अजरबैजान की सत्तारूढ़ 'येनी अजरबैजान पार्टी' ने इसे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार सामाजिक शांति के लिए इन नियमों में कोई बदलाव करेगी या फिर तुर्की के साथ यह तनाव और गहराएगा।
