Assam Floods: मौत का आंकड़ा 98 पहुंचा; सरकार ने शुरू की नुकसान का सर्वे

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Assam Floods: मौत का आंकड़ा 98 पहुंचा; सरकार ने शुरू की नुकसान का सर्वे

असम में बाढ़ का कहर जारी है, अब तक 98 लोगों की मौत हो चुकी है और 13 जिलों में 1.55 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए हैं। राज्य सरकार 9 अगस्त से घर-घर जाकर नुकसान का आंकलन शुरू करेगी ताकि पुनर्वास की ज़रूरतों का पता लगाया जा सके। बीमा और रूरल क्रेडिट सेक्टर के निवेशकों को इस घटना पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि फसल और संपत्ति के बड़े नुकसान से क्लेम बढ़ सकते हैं और प्रभावित इलाकों में लोन चुकाने में मुश्किलें आ सकती हैं।

असम में बाढ़ का बढ़ता संकट

असम में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, मरने वालों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। राज्य के 13 जिलों में 1.55 लाख से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं और अपने घरों व ज़रूरी ढांचों के तबाह होने से जूझ रहे हैं। इस संकट ने स्थानीय कृषि क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसमें 10,748 हेक्टेयर से ज़्यादा की फसलें पानी में डूब गई हैं। इससे हज़ारों किसानों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। इसके अलावा, 47,000 से ज़्यादा जानवरों के भी बाढ़ से प्रभावित होने की खबर है।

नुकसान का होगा घर-घर सर्वे

इस बड़े संकट से निपटने के लिए, असम सरकार ने एक विस्तृत नुकसान आंकलन अभियान शुरू करने की घोषणा की है। 9 अगस्त से शुरू होकर 30 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान के तहत, अधिकारी सबसे ज़्यादा प्रभावित चार जिलों - जोरहाट, शिवसागर, गोलाघाट और चराइदेव - में घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। सरकार का लक्ष्य 10 सितंबर तक पुनर्वास के लिए ज़रूरी फंड की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना है, ताकि राहत उपायों को सही दिशा दी जा सके।

बीमा और बैंकिंग सेक्टर पर असर

वित्तीय और आर्थिक दृष्टिकोण से, इस तरह की घटनाएं कई सेक्टर्स के लिए खास चुनौतियां पेश करती हैं। पूर्वोत्तर में सक्रिय बीमा कंपनियों को भारी मॉनसून के दौरान प्रॉपर्टी और फसल बीमा के क्लेम में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ता है। इससे जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के मार्जिन पर अस्थायी दबाव आ सकता है, क्योंकि उन्हें नुकसान के आंकलन और भुगतान को संभालना होता है।

इसी तरह, बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बैंकिंग और माइक्रोफाइनेंस सेक्टर भी अक्सर परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करते हैं। इन 13 जिलों के ग्रामीण कृषि क्षेत्र में ज़्यादा निवेश वाली संस्थाओं के लोन चुकाने के चक्र पर असर दिख सकता है। जब खड़ी फसलें तबाह हो जाती हैं और पशुधन प्रभावित होता है, तो ग्रामीण उधारकर्ताओं की छोटी अवधि में लोन चुकाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। जबकि बड़ी बैंकें आमतौर पर ऐसे क्षेत्रीय झटकों को झेलने के लिए विविध पोर्टफोलियो रखती हैं, इन खास बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में ग्रामीण ऋण पर केंद्रित छोटे ऋणदाता या माइक्रोफाइनेंस संस्थान अक्सर विश्लेषकों द्वारा नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) में संभावित वृद्धि या कलेक्शन में देरी के लिए देखे जाते हैं।

10,000 से ज़्यादा विस्थापित लोग फिलहाल 55 राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं, और तत्काल प्राथमिकता बचाव और राहत कार्य है। आने वाली सरकारी आंकलन रिपोर्ट आपदा के कुल आर्थिक नुकसान का आकलन करने के लिए अगला अहम बिंदु होगी। यह डेटा क्षेत्रीय उत्पादन के नुकसान की सीमा पर स्पष्टता देगा और प्रभावित कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं की रिकवरी की गति का अनुमान लगाने में मदद करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.