पूर्व G20 शेरपा Amitabh Kant ने भारत को 2026 की BRICS अध्यक्षता के दौरान कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की सलाह दी है। उन्होंने आगाह किया कि अमेरिका, यूरोप और चीन के साथ रिश्तों में तालमेल बिठाना 'Viksit Bharat' 2047 के आर्थिक लक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद अहम है।
कूटनीति और इकोनॉमी का कनेक्शन
भारत 2026 के लिए BRICS की अध्यक्षता संभाल रहा है, और ऐसे में पूर्व G20 शेरपा Amitabh Kant ने देश की रणनीतिक दिशा पर अपनी बात रखी है। उनका मानना है कि अगर भारत को 2047 तक अपने महत्वाकांक्षी इकोनॉमिक टारगेट्स हासिल करने हैं, तो उसे किसी एक विचारधारा के साथ खड़े होने के बजाय अलग-अलग पावर ब्लॉक्स के बीच एक 'ब्रिज' (Bridge) के रूप में काम करना होगा। यह संतुलन वैश्विक व्यापार और इन्वेस्टमेंट के लिए एक स्थिर माहौल बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
क्यों चुनौतीपूर्ण है यह भूमिका?
भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की बागडोर संभाली है। इस नेतृत्व के साथ सबसे बड़ा चैलेंज है—पश्चिमी देशों (US और यूरोप) के साथ अपने गहरे संबंधों को बचाए रखना और साथ ही BRICS+ ग्रुप, जिसमें चीन जैसे देश शामिल हैं, के साथ भी तालमेल बिठाना। Kant का सुझाव है कि समिट के दौरान जारी होने वाले दस्तावेजों में ऐसी भाषा से बचना चाहिए जिसे 'पश्चिम-विरोधी' माना जाए, ताकि दुनिया भर के प्रमुख बाजारों में भारत एक भरोसेमंद साथी बना रहे।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
इन्वेस्टर्स के लिए यह डिप्लोमैटिक स्टैंड सीधा मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित करता है। जियो-पॉलिटिकल तनाव अक्सर सप्लाई चेन में बाधा, ट्रेड पॉलिसी में सख्ती और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का कारण बनते हैं। अगर भारत बिना पश्चिमी देशों को नाराज किए BRICS को लीड करता है, तो यह फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के लिए एक बेहतर माहौल बनाएगा। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और देशों के अलग-अलग हितों के बीच सहमति बनाना एक कठिन कार्य बना रहेगा, जिस पर बाजार की नजरें टिकी रहेंगी।
