अफगानिस्तान के नूरीस्तान प्रांत में पाकिस्तान की ओर से आए घुसपैठियों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में **41** आतंकी मारे गए हैं, जबकि **62** को सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया है। डूरंड लाइन पर जारी यह तनाव दक्षिण एशिया में जियोपॉलिटिकल रिस्क और ट्रेड सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकता है।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, नूरीस्तान प्रांत के कामदेश जिले में हाल ही में एक बड़ा सुरक्षा अभियान चलाया गया। सरकार ने दावा किया है कि मारे गए आतंकी 'इस्लामिक स्टेट' समूह से जुड़े थे, जो पाकिस्तान की सीमा से होते हुए अफगान क्षेत्र में दाखिल हुए थे। इस घटना ने दोनों देशों के बीच पहले से ही खराब चल रहे संबंधों में कड़वाहट और बढ़ा दी है।
कूटनीतिक तनाव और विरोध
अफगान विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। काबुल का आरोप है कि पाकिस्तान की सरजमीं पर आतंकियों के लिए रिक्रूटमेंट और ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला दशकों से चल रहा है।
डूरंड लाइन का अनसुलझा मुद्दा
करीब 2,600 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन आज भी दक्षिण एशिया में अस्थिरता का मुख्य कारण बनी हुई है। अफगानिस्तान इस सीमा को अंतरराष्ट्रीय रेखा के रूप में मान्यता नहीं देता, जिसके चलते यहां अक्सर सैन्य टकराव होते रहते हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक सीमा पार हिंसा के कारण 1,100 से ज्यादा नागरिकों की जान जा चुकी है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिहाज से ऐसी भू-राजनीतिक अस्थिरता सीधे तौर पर सीमा पार व्यापार और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) पर असर डालती है। फिलहाल यह एक स्थानीय सुरक्षा घटना है, लेकिन अगर तनाव बढ़ता है तो यह दक्षिण एशियाई देशों के आर्थिक आउटलुक और रीजनल ट्रांजिट कॉरिडोर के लिए बड़ा रिस्क साबित हो सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब दोनों देशों के अगले डिप्लोमैटिक कदमों पर नजर बनाए हुए हैं।
