नूरिस्तान सीमा पर हुई एक हिंसक झड़प में **28** लोगों की मौत हो गई है, जिससे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक खाई और गहरी हो गई है। काबुल ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों पर घुसपैठ का आरोप लगाया है, जिसे इस्लामाबाद ने सिरे से खारिज कर दिया है।
नूरिस्तान प्रांत के कामदेश जिले में हुई इस हिंसक मुठभेड़ के बाद सुरक्षा हालात काफी बिगड़ गए हैं। काबुल प्रशासन के मुताबिक, शनिवार को एक सशस्त्र समूह ने सीमा पार की, जिसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में 28 लोग मारे गए और 32 घायल हुए। अफगान रक्षा मंत्रालय का दावा है कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या उन पूर्व सुरक्षाकर्मियों की है, जिन्हें 2021 में उनकी सेवाओं से हटा दिया गया था।
कूटनीतिक तनाव और आरोप-प्रत्यारोप
यह घटना अब एक बड़े कूटनीतिक विवाद में बदल चुकी है। काबुल ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि इस ऑपरेशन को पाकिस्तानी सुरक्षा और खुफिया ढांचे का समर्थन प्राप्त था। अफगान अधिकारियों का दावा है कि इन लोगों को पाकिस्तान के अंदर प्रशिक्षण और भर्ती दी गई थी। हालांकि, इस्लामाबाद ने इन दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताते हुए इसे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है।
क्षेत्रीय अस्थिरता और निवेश का नजरिया
दक्षिण एशियाई बाजारों पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय है। हाल ही में पाकिस्तान द्वारा अफगान क्षेत्र में किए गए हवाई हमलों के बाद यह तनाव और बढ़ गया है। इससे पहले कोहाट और हंगू जिलों में हुए आतंकी हमलों में 30 लोगों की जान गई थी, जिसकी जिम्मेदारी 'शूरा इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन' ने ली थी।
सुरक्षा सहयोग का लगातार विफल होना और सीमा पार की अस्थिरता क्षेत्रीय व्यापारिक सेंटीमेंट को प्रभावित कर रही है। भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risk) और अनिश्चितता का यह माहौल भविष्य में विदेशी नीतियों और सुरक्षा संबंधी बजट आवंटन को सीधे प्रभावित कर सकता है।
