Afghanistan Economic Crisis: 12 लाख लोगों की वापसी से बढ़ा दबाव, गहराता मानवीय संकट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Afghanistan Economic Crisis: 12 लाख लोगों की वापसी से बढ़ा दबाव, गहराता मानवीय संकट

अफगानिस्तान इस साल ईरान और पाकिस्तान से लौटे 12 लाख लोगों के कारण गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है। 92% परिवार कर्ज में डूबे हैं और संयुक्त राष्ट्र (UN) की **$1.7 बिलियन** की अपील का केवल **29.9%** ही फंड मिल पाया है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ है।

अफगानिस्तान इस समय एक बड़े मानवीय आपातकाल (Humanitarian Emergency) से गुजर रहा है। साल 2026 के शुरुआती आठ महीनों में ही पड़ोसी देशों से लगभग 12 लाख लोगों की वापसी ने बुनियादी ढांचे को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। यह विस्थापन ऐसे समय पर हुआ है जब देश पहले से ही खाद्य असुरक्षा और चरमराई अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है।

आर्थिक तनाव और फंड की भारी कमी

आर्थिक मोर्चे पर स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है। साल 2025 में विकास दर 4.8% रही, लेकिन प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) में 5.6% की गिरावट दर्ज की गई। इस खाई को भरने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने $1.7 बिलियन की मदद मांगी थी, लेकिन अब तक लक्ष्य का मात्र 29.9% फंड ही मिल पाया है। इस फंड की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां बुनियादी सुविधाएं देने में बेबस हैं।

वापस लौटने वाले परिवारों की स्थिति बदतर है। सर्वे के अनुसार, करीब 92% परिवार कर्ज के बोझ तले दबे हैं और बेरोजगारी चरम पर है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 63% बच्चे स्कूली शिक्षा से दूर हैं, जिससे भविष्य के लिए मानव संसाधन का संकट खड़ा हो गया है।

क्षेत्रीय अस्थिरता और चुनौतियां

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव के कारण साल 2026 में 1,100 से ज्यादा आम नागरिक हताहत हुए हैं। यह हिंसा व्यापार और लोगों की आवाजाही को मुश्किल बना रही है। भारत ने मेडिकल क्लीनिक और अस्थायी आश्रय देकर राहत पहुंचाने की कोशिश की है, लेकिन जरूरतें बहुत बड़ी हैं। काबुल प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इस बिगड़ती आर्थिक प्रणाली को संभालने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जुटाने की है।

भविष्य की चिंताएं

अगले कुछ क्वार्टर में अंतरराष्ट्रीय मदद की स्थिति, सीमा पर सुरक्षा, और प्रति व्यक्ति आय में सुधार के संकेत सबसे महत्वपूर्ण होंगे। मैक्रो-ग्रोथ के आंकड़ों और जमीनी स्तर पर परिवारों के कर्ज के बीच का अंतर ही यह तय करेगा कि अर्थव्यवस्था आगे किस दिशा में जा रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.