अफगानिस्तान: महिलाओं को बाहर रखने की आर्थिक कीमत 5 साल बाद बढ़ी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
अफगानिस्तान: महिलाओं को बाहर रखने की आर्थिक कीमत 5 साल बाद बढ़ी

अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन के सत्ता में आए 5 साल हो गए हैं। यूएन वुमन की रिपोर्ट के अनुसार, अब आधी अफगान महिलाएं महीने में केवल दो बार ही घर से बाहर निकलती हैं। घरों में कैद रहने की यह स्थिति, औपचारिक श्रम बाजार से पूरी तरह बाहर रखा जाना और हाल ही में घर से काम करने वालों के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता बंद होने से, गंभीर दीर्घकालिक आर्थिक और मानवीय जोखिम पैदा कर रहा है।

महिलाओं के बाहर निकलने पर पाबंदियों का आर्थिक असर

अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन के सत्ता संभालने के 5 साल पूरे हो गए हैं, इस दौरान देश की सामाजिक और आर्थिक संरचना में बड़े बदलाव देखे गए हैं। यूएन वुमन की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के बाहर निकलने पर पाबंदियों की स्थिति गंभीर हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 50% अफगान महिलाओं ने बताया कि वे महीने में केवल एक या दो बार ही अपने घर से बाहर निकलती हैं।

आर्थिक मंदी और श्रम बल से बाहर

आर्थिक विश्लेषण की दृष्टि से देखें तो, महिलाओं को कार्यबल से बाहर रखने की नीति देश की गहरी होती आर्थिक मंदी का मुख्य कारण बनी हुई है। श्रम भागीदारी में भारी अंतर है, जहां केवल 7% महिलाएं रोजगार पाती हैं, जबकि 84% पुरुष कार्यरत हैं। यह अलगाव सिर्फ एक सामाजिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह संभावित आर्थिक उत्पादकता में एक बड़ा नुकसान दर्शाता है। अनुमान है कि 2026 के अंत तक इस बहिष्करण की संचयी आर्थिक लागत अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है।

घर से काम करने वालों के लिए वित्तीय सहायता बंद

2026 की पहली छमाही में परिवारों पर आर्थिक दबाव तब और बढ़ गया जब वित्त मंत्रालय ने उन महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए 5,000 अफगानी के मासिक स्टाइपेंड को बंद करने का फैसला किया, जो घर से काम कर रही थीं। इस सहायता को वापस लेने से परिवारों की डिस्पोजेबल आय और कम हो गई है, जिससे बाहरी मानवीय सहायता पर निर्भरता बढ़ गई है, जबकि पहले से ही सहायता राशि घट रही है।

मानवीय और विकास संबंधी जोखिम

दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक ढांचा - विशेष रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा - गंभीर रूप से खराब हो रहा है। लड़कियों को अभी भी माध्यमिक और उच्च शिक्षा प्राप्त करने से रोका जा रहा है, जिससे मानव पूंजी में दीर्घकालिक कमी आ रही है। अनुमान है कि यदि वर्तमान प्रतिबंध जारी रहे, तो 2030 तक अफगानिस्तान को 25,000 से अधिक महिला शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में इस कमी का असर पहले से ही महसूस किया जा रहा है। आवाजाही पर लगी पाबंदियों के कारण चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच सीमित हो गई है और महिला स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी के कारण, मातृ स्वास्थ्य परिणामों में गिरावट आई है। 2024 में मातृ मृत्यु दर 100,000 जीवित जन्मों पर 638 मौतों का अनुमान लगाया गया है। यह संकट एनजीओ (NGOs) की वित्तीय अस्थिरता से और बढ़ गया है, जो आवश्यक सेवाओं के वितरण के प्राथमिक माध्यम के रूप में काम करते हैं। सर्वेक्षण में शामिल लगभग तीन-चौथाई एनजीओ (NGOs) ने 2025 में धन में कमी की सूचना दी, और उनमें से कई अब बंद होने या संचालन निलंबित होने के जोखिम का सामना कर रहे हैं।

क्षेत्र के लिए निगरानी योग्य बिंदु

क्षेत्र के पर्यवेक्षकों के लिए, मुख्य ध्यान अंतरराष्ट्रीय मान्यता की अनुपस्थिति और मानवीय सहायता की नकदी में कमी के बीच वर्तमान आर्थिक नीतियों की स्थिरता पर बना हुआ है। राजकोषीय बाधाओं, संभावित कार्यबल के एक बड़े हिस्से को बाहर रखने और अंतरराष्ट्रीय सहायता में और कटौती की संभावना का संयोजन बताता है कि अफगानिस्तान का आर्थिक माहौल अस्थिर बना रहेगा। बाजार विश्लेषक लगातार इस बात पर नजर रखेंगे कि ये घरेलू नीतियां बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता और अनौपचारिक आर्थिक संरचनाओं पर निरंतर निर्भरता को कैसे प्रभावित करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.