AIADMK नेता कोवई सत्यन ने Mekedatu जलाशय प्रोजेक्ट को लेकर कर्नाटक सरकार को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन करके एकतरफा निर्माण करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
कावेरी जल विवाद एक बार फिर गरमा गया है। AIADMK ने कर्नाटक सरकार को साफ शब्दों में कह दिया है कि अगर Mekedatu बैलेंसिंग रिजर्वोयर प्रोजेक्ट पर बिना सहमति या जरूरी मंजूरी के काम आगे बढ़ाया गया, तो पार्टी कानूनी रास्ता अपनाएगी।\n\nयह प्रोजेक्ट लंबे समय से विवादों में है। जहां कर्नाटक सरकार का दावा है कि बेंगलुरु की पानी की जरूरतों और बिजली उत्पादन के लिए यह बांध जरूरी है, वहीं तमिलनाडु का कहना है कि इससे कावेरी डेल्टा क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत हो जाएगी। राज्य को डर है कि इससे किसानों की आजीविका और जल सुरक्षा पर बुरा असर पड़ेगा।\n\nजून 2026 में तमिलनाडु विधानसभा ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पास किया था। फिलहाल यह मामला Cauvery Water Management Authority (CWMA) और Cauvery Water Regulation Committee (CWRC) के पास है। सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले कहा था कि प्रोजेक्ट का Detailed Project Report (DPR) मूल्यांकन के अधीन है, इसलिए कई कानूनी आपत्तियां फिलहाल समय से पहले हैं।\n\nनिवेशकों और नीति विशेषज्ञों के लिए यह खबर काफी अहम है। इंटर-स्टेट वॉटर शेयरिंग से जुड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में राजनीतिक और रेगुलेटरी रिस्क हमेशा बना रहता है। इस तरह के विवादों से न केवल प्रोजेक्ट में देरी होती है, बल्कि पूरे दक्षिण भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और एग्रीकल्चर सेक्टर की प्लानिंग पर भी अनिश्चितता के बादल छाए रहते हैं। आने वाले समय में CWMA और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर नजर रखना जरूरी होगा।
