9/11 की 25वीं बरसी पर राष्ट्रपति Donald Trump और डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth ने Iran के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष को 'War on Terror' का विस्तार करार दिया है। इस सख्त रुख से ग्लोबल ऑयल मार्केट और निवेशकों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
9/11 हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर पेंटागन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के साथ चल रहे छह महीने पुराने सैन्य संघर्ष पर अपना रुख साफ कर दिया है। राष्ट्रपति Donald Trump और डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth ने इसे ईरान की परमाणु क्षमता रोकने और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए एक अनिवार्य कदम बताया है।
मार्केट और इकोनॉमी पर क्या होगा असर?
यह संघर्ष 28 फरवरी, 2026 से शुरू हुआ था और तब से यह ग्लोबल मार्केट में भारी अनिश्चितता का कारण बना हुआ है। प्रशासन की बातों से साफ है कि मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द खत्म होने वाला नहीं है। निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि एनर्जी मार्केट्स में उतार-चढ़ाव (Volatility) और सप्लाई चेन में बाधाएं बनी रह सकती हैं।
भारत जैसे देशों के लिए, जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम चिंता का विषय हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है, जिससे एविएशन, पेंट्स और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स के मुनाफे पर दबाव देखने को मिल सकता है।
सरकारी फंडिंग और निवेशकों के लिए रिस्क
पेंटागन द्वारा कांग्रेस से अतिरिक्त फंड की मांग ने अमेरिकी राजकोषीय स्वास्थ्य (Fiscal Health) पर भी सवाल खड़े किए हैं। इसका सीधा असर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स पर पड़ता है, जिससे ग्लोबल रिस्क एपेटाइट कम हो जाती है। जब यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं, जिससे BSE Sensex और NSE Nifty जैसे इंडेक्स में हलचल तेज हो जाती है।
आगे क्या नजर रखें?
अमेरिका में 3 नवंबर, 2026 को होने वाले मिडटर्म इलेक्शन के मद्देनजर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। बढ़ती कीमतों और महंगाई का असर वहां के वोटर्स पर पड़ रहा है। निवेशकों को अब ऑयल प्राइस ट्रेंड्स और अमेरिकी डिफेंस फंडिंग के अपडेट्स पर बारीक नजर रखनी होगी, क्योंकि यही तय करेंगे कि ग्लोबल फाइनेंशियल कंडीशंस पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा।
