तिब्बत के नाग्चु इलाके में गुरुवार देर रात **7.0** की तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह आपदा अगस्त 2026 में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद चल रहे राहत कार्यों के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आई है।
भूकंप की गंभीरता और केंद्र
गुरुवार देर रात उत्तरी तिब्बत के नाग्चु (Nagqu) क्षेत्र में 7.0 की तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र जमीन से मात्र 10 किमी की गहराई पर था, जिससे सतह पर भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज के अनुसार, भले ही इसका केंद्र ल्हासा से लगभग 400 किमी दूर था, लेकिन भूकंप की उथली प्रकृति चिंता का विषय बनी हुई है।
पुरानी आपदाओं से बढ़ी मुश्किलें
यह इलाका पहले से ही अगस्त 2026 में आई एक बड़ी प्राकृतिक आपदा के जख्म झेल रहा है। चीन-नेपाल सीमा के पास हुए ग्लेशियल कोलैप्स (Glacial Collapse) की वजह से आई बाढ़ और भूस्खलन में 1,400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6,000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अब इस नए भूकंप ने उन बचाव कार्यों को और जटिल बना दिया है जो हफ्तों से दुर्गम इलाकों में चल रहे थे।
चुनौतीपूर्ण भूगोल और प्रशासनिक आकलन
ऊंचे पहाड़ों और कठिन रास्तों के कारण रेस्क्यू टीमों को पहले ही काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए पुलों और सड़कों पर इस भूकंप के असर का आकलन करना अभी बाकी है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी और स्थानीय अधिकारी डेटा जुटा रहे हैं। फिलहाल प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित निकालने की है, लेकिन संचार व्यवस्था ठप होने के कारण दूर-दराज के इलाकों से सटीक जानकारी मिलने में देरी हो रही है।
