US Midterm Elections में अब तक **5.3 करोड़** से ज्यादा अमेरिकियों ने अर्ली वोटिंग की है, जो **2022** के आंकड़ों से कहीं अधिक है। भारतीय निवेशकों के लिए यह चुनाव बेहद अहम है क्योंकि इसका सीधा असर ग्लोबल ट्रेड और मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ सकता है।
चुनावी सरगर्मी और रिकॉर्ड वोटिंग
3 नवंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में अब तक 5.3 करोड़ से ज्यादा अर्ली वोट डाले जा चुके हैं। यह आंकड़ा 2022 में इसी समय तक पड़े 4.59 करोड़ वोटों से काफी ज्यादा है। यह चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए एक बड़े 'रेफरेंडम' की तरह देखा जा रहा है, जिसमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की 435 और सीनेट की 35 सीटों पर मुकाबला है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का समीकरण बदलने से वहां की ट्रेड पॉलिसी, फॉरेन रिलेशन और फिस्कल प्रायोरिटीज बदल सकती हैं। भारतीय शेयर बाजार के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि टैरिफ, एनर्जी और जियोपॉलिटिकल स्ट्रैटेजी में बदलाव आने से ग्लोबल इक्विटी मार्केट में वोलैटिलिटी (Volatility) बढ़ सकती है। निवेशक फिलहाल महंगाई और बढ़ती लागत जैसे मुद्दों पर अमेरिका के रुख पर नजर गड़ाए हुए हैं।
चुनावी माहौल और मार्केट का रुख
हालांकि अर्ली वोटिंग के आंकड़ों में डेमोक्रेट्स का पलड़ा भारी दिख रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अंतिम नतीजे ही कांग्रेस की असली तस्वीर तय करेंगे। चुनाव प्रक्रिया के दौरान कानूनी विवादों और मेल-इन वोटिंग को लेकर मचे बवाल ने मार्केट में एक सतर्कता का माहौल बनाया है। निवेशकों को डर है कि अगर नीतिगत अनिश्चितता बनी रही, तो इसका असर ब्याज दरों और ग्लोबल ट्रेड पर पड़ सकता है। आने वाले समय में नई कांग्रेस का गठन यह तय करेगा कि अमेरिका का इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग और कॉर्पोरेट रेगुलेशन का एजेंडा क्या होगा, जो आने वाले दो सालों के लिए ग्लोबल इकोनॉमी की दिशा तय करेगा।
