आंध्र प्रदेश के पांच युवक रूस में फंस गए हैं। उन्हें नौकरी का लालच देकर रूस की सेना में भर्ती कर लिया गया है। परिजनों ने अब सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
जेत्ती वामसी (Jetti Vamsi) समेत आंध्र प्रदेश के पांच लोग रूस में एक बड़े धोखे का शिकार हो गए हैं। इन लोगों को विदेश में लॉजिस्टिक्स और फूड पैकिंग जैसी नौकरियों का सपना दिखाकर वहां बुलाया गया था। लेकिन रूस पहुंचते ही इनकी जिंदगी एक खौफनाक मोड़ पर आ गई। इन लोगों को धोखे से रूसी सेना के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करवा लिए गए।
भाषा का धोखा और नागरिकता का जाल
भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से रूसी भाषा में थी, जिसे ये पांचों समझ नहीं सके। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दस्तावेजों में ऐसी शर्तें थीं जो इन्हें अनजाने में रूसी नागरिकता देती हैं और ऐसा दावा किया गया कि इससे उनकी भारतीय नागरिकता खत्म हो गई है। यह उनके लिए एक बड़ी कानूनी मुसीबत बन गई है, क्योंकि अब उनके पास वापस आने के रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं।
फ्रंटलाइन पर तैनात होने का खतरा
इन्हें शुरू में नॉन-कॉम्बैट (गैर-लड़ाकू) भूमिकाओं का वादा किया गया था, लेकिन अब पता चला है कि इन्हें यूक्रेन सीमा के पास तैनात किया जा रहा है, जहां इन्हें ट्रेंच (खाई) खोदने जैसे काम सौंपे गए हैं। बिना किसी ट्रेनिंग के इन्हें युद्ध क्षेत्र में धकेलने से इनके परिजनों में कोहराम मचा है।
अब सरकार से उम्मीदें
जेत्ती वामसी की मां जे. अप्पाकोंडा ने अधिकारियों से अपने बेटे की सुरक्षित वापसी की अपील की है। आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने भी इस मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है और वे इस संकट को सुलझाने के लिए उच्च स्तर पर बातचीत कर रहे हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कूटनीतिक स्तर पर भारत सरकार इन युवाओं को वापस लाने में कितनी जल्द सफलता हासिल करती है।
