2026 US मिडटर्म चुनावों में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने बड़ी जीत हासिल की है। पिया डंडिया और सुहास सुब्रमण्यम की जीत के बाद अब भारतीय निवेशक अमेरिका की बदलती ट्रेड, इमिग्रेशन और फॉरेन पॉलिसी पर नजरें टिकाए हुए हैं।
3 नवंबर, 2026 को संपन्न हुए अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजे आने शुरू हो गए हैं, जिसने भारतीय मूल के राजनेताओं के बढ़ते प्रभाव को साबित कर दिया है। इस चुनावी चक्र में अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की 435 सीटें, 37 सीनेट सीटें और 36 गवर्नर्सशिप के लिए मतदान हुआ था।
प्रमुख दिग्गजों की जीत
डेमोक्रेटिक पार्टी की पिया डंडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से 51.9% वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वहीं, वर्जीनिया में सुहास सुब्रमण्यम ने अपने 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट की सीट को 63.16% वोटों के साथ सफलतापूर्वक बचा लिया है। इसके अलावा, मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के तौर पर अरुणा मिलर की पुनर्नियुक्ति ने अमेरिकी गवर्नेंस में भारतीय मूल के लोगों की मजबूत पकड़ को और पुख्ता कर दिया है।
दूसरी तरफ, कुछ कड़े मुकाबले अभी भी जारी हैं। ओहायो के गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी और डेमोक्रेट एमी एक्टन के बीच कांटे की टक्कर है, जिसका असर राज्य स्तर की नीतियों पर पड़ेगा।
भारतीय बाजारों के लिए मायने
अमेरिकी संसद का नया स्वरूप भारतीय निवेशकों और बिजनेस जगत के लिए बेहद अहम है। अमेरिका की ट्रेड टैरिफ, H-1B वीजा पॉलिसी और फॉरेन पॉलिसी में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर भारत के आईटी, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रभावित करता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि हाउस और सीनेट के बीच सत्ता का संतुलन बिगड़ता है या किसी तरह की राजनीतिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो नीतिगत फैसलों में देरी हो सकती है। इसके अलावा, जिन सीटों पर कड़ा मुकाबला है, वहां कानूनी चुनौतियों और वोट काउंटिंग में देरी से आने वाले दिनों में ग्लोबल मार्केट में शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी (Volatility) देखने को मिल सकती है। निवेशकों की अब नजर अगली रिपोर्ट पर है, जहां से कांग्रेसनल कमेटियों के गठन और आगे की पॉलिसी दिशा का पता चलेगा।
