ग्रोथ की राह पर Zomato: नतीजे क्या कहते हैं?
Zomato के फूड डिलीवरी बिजनेस ने 2025 की आखिरी तिमाही (October-December) में कमाल का प्रदर्शन किया है। कंपनी की नेट ऑर्डर वैल्यू (NOV) में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 16.6% का उछाल आया और यह ₹9,846 करोड़ पर पहुंच गई। इससे ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) में 21.3% की वृद्धि दर्ज हुई, जो पिछली तिमाही के 13.8% के मुकाबले काफी बेहतर है। कंपनी के मंथली ट्रांजैक्टिंग यूज़र्स (MTU) भी 21% बढ़कर 24.9 मिलियन हो गए। इस शानदार ग्रोथ की मुख्य वजह त्योहारी सीजन की मांग और ग्राहकों को लुभाने वाली किफायती स्कीम्स रहीं, खास तौर पर टियर-II और टियर-III शहरों में।
हालांकि, इन अच्छे नतीजों के बावजूद, पिछले छह महीनों में Zomato के शेयरों में 29.34% की गिरावट आई है, भले ही 7 मार्च 2026 तक साल-दर-साल आधार पर यह 3.17% ऊपर रहा हो। यह विरोधाभास दिखाता है कि निवेशक अभी भी कुछ सावधानी बरत रहे हैं।
Valuation और Competition की दोहरी मार
Zomato के ग्रोथ फेज को देखते हुए, इसकाvaluation काफी हाई-ग्रोथ कैटेगरी में है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो हाल के समय में 93.3, 293 या 900 से भी ऊपर देखा गया है। इसका मतलब है कि निवेशक कंपनी की कमाई के लिए काफी प्रीमियम चुका रहे हैं। यह हाईvaluation तब है जब भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट परिपक्व हो रहा है और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
मुख्य रूप से Zomato और Swiggy का दबदबा है, लेकिन क्लाउड किचन और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स (जैसे Zomato का Blinkit और Swiggy का Instamart) भी ग्राहकों के व्यवहार को बदल रहे हैं और नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं। इसके अलावा, व्यापक मैक्रोइकॉनॉमिक ट्रेंड्स मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। 2024 में ई-रिटेल ग्रोथ धीमी होकर 10-12% पर आ गई है, जो पहले 20% से अधिक थी। हालांकि, 2025 के अंत तक नीतिगत हस्तक्षेपों और खपत चक्र के पुनरुद्धार से इसमें तेजी की उम्मीद है।
चिंताएं और भविष्य की राह
हालिया ग्रोथ के बावजूद, कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। ऑर्डर वॉल्यूम बढ़ाने के लिए Zomato का डिस्काउंट पर निर्भर रहना एक बड़ी चिंता है, जो मार्जिन की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। हालांकि यूनिट इकोनॉमिक्स में सुधार हो रहा है, लेकिन डिलीवरी खर्च जैसे भारी ऑपरेशनल लागतों के कारण मार्जिन ऐतिहासिक रूप से कम रहा है, और कंपनी 2023 में ही मुनाफे में आई है।
प्रतिद्वंद्वी भी आक्रामक तरीके से विस्तार कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, Swiggy ने क्विक मील्स के लिए SNACC ऐप लॉन्च किया है, जो Zomato की रैपिड डिलीवरी को सीधे चुनौती दे रहा है। फरवरी 2026 में, Zomato के शेयर 6% से अधिक गिर गए थे जब Q4 FY24 के नतीजे स्ट्रीट की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, भले ही कंपनी ने साल-दर-साल मुनाफा बढ़ाया हो। कंपनी की सहायक कंपनियों ने भी नेट लॉस दर्ज किया है, जो समेकित वित्तीय प्रदर्शन को जटिल बना रहा है।
विश्लेषकों का नज़रिया
विश्लेषकों का Zomato पर नज़रिया मिला-जुला है, जो सेक्टर की गतिशील प्रकृति और कंपनी के निरंतर रणनीतिक विकास को दर्शाता है। आम तौर पर 'मॉडरेट बाय' या 'होल्ड' की रेटिंग है, और विभिन्न ब्रोकरेज फर्मों के 12 महीने के टारगेट प्राइस ₹370 से ₹420 के बीच हैं।
कुछ विश्लेषकों, जैसे JM Financial, को मौसमी उतार-चढ़ाव के कारण निकट भविष्य में GOV में क्रमिक गिरावट की उम्मीद है, लेकिन वे 2025 की दूसरी छमाही में टेक-रेट विस्तार और बेहतर EBITDA मार्जिन की उम्मीद करते हैं। Jefferies ने क्विक कॉमर्स में ब्रेक-ईवन हासिल करने की बात स्वीकार करते हुए अपने प्राइस टारगेट को एडजस्ट किया है, जो आक्रामक विकास पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव देता है। भारत के ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी मार्केट का दीर्घकालिक दृष्टिकोण मजबूत बना हुआ है, जिसमें इंटरनेट की बढ़ती पैठ, शहरीकरण और सुविधा व डिजिटल सेवाओं के लिए बदलते उपभोक्ता रुझानों से महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद है। Zomato की अपनी विस्तृत प्लेटफॉर्म का लाभ उठाने, क्विक कॉमर्स सेगमेंट को अनुकूलित करने और प्रतिस्पर्धी दबावों के अनुकूल होने की क्षमता तेजी से बदलते बाजार में अपनी भविष्य की क्षमता को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण होगी।